पीएम मोदी ने काशी में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी देखी। यह घड़ी सूर्योदय आधारित समय, पंचांग और ग्रहों की स्थिति बताती है। क्यों सीएम मोहन यादव दे रहे हैं इतना जोर जानिए इसकी खासियतें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन किया, इस दौरान उन्होंने घड़ी की कार्यप्रणाली को करीब से समझा और इसकी विशेषताओं के बारे में जानकारी ली। यह घड़ी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर विकसित की गई है और अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है. यह वैदिक घड़ी केवल समय ही नहीं बताती, बल्कि पंचांग, मुहूर्त, सूर्योदय और ग्रहों की स्थिति की जानकारी भी देती है। इसकी डिजाइन और गणना प्रणाली पूरी तरह भारतीय वैदिक कालगणना पर आधारित है।
क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी?
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी एक पारंपरिक भारतीय समय प्रणाली पर आधारित घड़ी है, जिसे उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के विद्वानों ने तैयार किया है, यह घड़ी आधुनिक 24 घंटे की प्रणाली के बजाय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय पर आधारित है. यानी दिन की शुरुआत मध्यरात्रि नहीं, बल्कि सूर्योदय से मानी जाती है।
कैसे काम करती है यह वैदिक घड़ी?
इस घड़ी की सबसे खास बात इसकी गणना प्रणाली है। यह पारंपरिक घड़ी की तरह घंटे और मिनट में समय नहीं दिखाती, बल्कि वैदिक गणना पर आधारित डेटा देती है।
- सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
- दैनिक पंचांग और मुहूर्त
- ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति
- धार्मिक कार्यों के लिए शुभ समय
इसी कारण इसे धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
काशी और उज्जैन से जुड़ता वैदिक समय का मॉडल
यह घड़ी पहले उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में स्थापित की गई थी। बाद में इसे काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में भी लगाया गया. उज्जैन को इस परियोजना का केंद्र माना जा रहा है क्योंकि इसे कर्क रेखा पर स्थित और खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान बताया जाता है।
क्यों सीएम मोहन यादव इस पर जोर दे रहे हैं?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि भारत की प्राचीन वैदिक कालगणना को फिर से वैश्विक स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि पश्चिमी देशों द्वारा अपनाया गया ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) आधी रात से दिन की शुरुआत मानता है, जबकि भारतीय परंपरा सूर्योदय आधारित समय को अधिक वैज्ञानिक और प्राकृतिक मानती है.इसी सोच के तहत वैदिक घड़ी को विकसित किया गया और इसे धार्मिक स्थलों पर स्थापित किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने ली पूरी जानकारी
काशी दौरे के दौरान पीएम मोदी ने वैदिक घड़ी को नजदीक से देखा और इसकी कार्यप्रणाली को समझा। कुछ समय पहले इसे काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया था, जिसे अब श्रद्धालुओं और पर्यटकों का खास आकर्षण माना जा रहा है,इस पहल को भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक के मेल के रूप में भी देखा जा रहा है।