उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण और भाद्रपद मास के दौरान निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारियों का कार्यक्रम तय किया गया है, जिसमें सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण और भाद्रपद (भादौ) मास के दौरान निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारियों का कार्यक्रम तय कर दिया गया है। इस वर्ष श्रावण मास की पहली सवारी 3 अगस्त को निकलेगी, जबकि अंतिम राजसी (शाही) सवारी 7 सितंबर को आयोजित की जाएगी।
श्रावण मास में कुल चार और भाद्रपद (भादौ) मास में दो सवारियां निकाली जाएंगी। संभावित लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और दर्शन व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।रविवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सवारी मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, कांवड़ यात्रियों की व्यवस्था तथा वीआईपी दर्शन सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
सवारियों का कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा
महाकाल की पालकी महाकाल मंदिर के सभा मंडप में पूजन-अर्चन के बाद पारंपरिक मार्ग से निकलेगी। यह महाकाल लोक, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। वहां से पालकी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और गुदरी बाजार से होकर पुनः महाकाल मंदिर लौटेगी।7 सितंबर को निकलने वाली राजसी (शाही) सवारी में टंकी चौराहे से आगे मिर्जा नईम बेग मार्ग, तेलीवाड़ा, कंठाल, सती गेट और सराफा मार्ग भी शामिल रहेगा।