उज्जैन में हरसिद्धि माता के साथ अवंतिका देवी भी शक्तिपीठ मानी जाती हैं। नवरात्रि में इन दोनों मंदिरों का विशेष महत्व है, जानिए पूरी जानकारी।
नवरात्रि के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के उज्जैन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। अधिकांश भक्त Harsiddhi Mata Temple को ही शक्तिपीठ मानते हैं, लेकिन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां दूसरा शक्तिपीठ Avantika Devi Temple भी स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उज्जैन में दो शक्तिपीठ हैं। Harsiddhi Mata Temple में सती की कोहनी गिरी थी, जबकि Avantika Devi Temple के स्थान पर सती के होंठ गिरने की मान्यता है। अवंतिका देवी को उज्जैन की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है और इनका संबंध शहर की समृद्धि और विकास से जोड़ा जाता है।
महाकाल मंदिर परिसर में स्थित
Mahakaleshwar Temple परिसर में स्थित अवंतिका देवी मंदिर आम भक्तों के लिए सीमित रूप से खुला रहता है। यह मंदिर पालकी द्वार के पास, श्रीराम मंदिर के पीछे स्थित है। पहले यह स्थान एक ऊंची टेकरी पर था, जहां से दोनों शक्तिपीठों के दर्शन एक साथ होते थे, लेकिन समय के साथ वह संरचना समाप्त हो गई।
ग्रंथों में मिलता है उल्लेख
धार्मिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत में अवंतिका देवी का उल्लेख मिलता है। विद्वानों के अनुसार, यह शक्तिपीठ पौराणिक रूप से प्रमाणित है और इसकी मान्यता प्राचीन काल से चली आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई की मुंबा देवी की तरह अवंतिका देवी भी शहर की अधिष्ठात्री शक्ति का प्रतीक हैं।

स्वयंभू मानी जाती है प्रतिमा
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, अवंतिका देवी की प्रतिमा स्वयंभू है और खड़ी मुद्रा में विराजमान है। यह विशेषता इसे अन्य शक्तिपीठों से अलग बनाती है। Navratri के दौरान इन दोनों शक्तिपीठों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां पूजा करने से यश, कीर्ति और समृद्धि प्राप्त होती है। उज्जैन में नवरात्रि के समय हरसिद्धि और अवंतिका देवी दोनों के दर्शन को बेहद शुभ माना जाता है।