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Puri Jagannath Snana Purnima 108 Sacred Pots Ritua

पुरी में आज देवस्नान पूर्णिमा: 108 घड़ों के पवित्र जल से होगा भगवान जगन्नाथ का महास्नान, 15 दिन रहेंगे अनावसार में

पुरी जगन्नाथ मंदिर में देवस्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 घड़ों के पवित्र जल से महास्नान होगा। इसके बाद 15 दिनों तक अनावसार काल रहेगा।


पुरी में आज देवस्नान पूर्णिमा 108 घड़ों के पवित्र जल से होगा भगवान जगन्नाथ का महास्नान 15 दिन रहेंगे अनावसार में

पुरी। ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को देवस्नान पूर्णिमा का भव्य आयोजन होगा। विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले मनाया जाने वाला यह महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र के वार्षिक महास्नान का अवसर होता है। इस दिन तीनों देवताओं को 108 घड़ों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है।

सोने के कुएं से लाया जाएगा पवित्र जल

मंदिर परिसर के उत्तर भाग में स्थित प्रसिद्ध ‘सोने के कुएं’ से 108 पीतल के घड़ों में जल भरकर लाया जाएगा। मान्यता है कि इस कुएं की दीवारों में मंदिर के संस्थापक राजा इंद्रद्युम्न ने सोने की ईंटें लगवाई थीं। कुएं पर भारी लोहे का ढक्कन लगा है, जिसे कई सेवक मिलकर हटाते हैं। यह कुआं वर्ष में केवल देवस्नान पूर्णिमा के दिन ही खोला जाता है।

स्नान के बाद 15 दिनों तक नहीं होंगे दर्शन

धार्मिक परंपरा के अनुसार, ठंडे जल से स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद वे 15 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते। इस अवधि को ‘अनावसार’ कहा जाता है, जो ज्येष्ठ पूर्णिमा से आषाढ़ अमावस्या तक चलती है। इस दौरान मंदिर में मूल विग्रहों के स्थान पर उनके पट्टा चित्रों की पूजा की जाती है और श्रद्धालुओं को उन्हीं के दर्शन कराए जाते हैं। अनावसार काल समाप्त होने के बाद भगवान ‘नवयौवन रूप’ में पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं।

अनावसार काल में विशेष नियम

मान्यता है कि इस अवधि में देवताओं का उपचार राजवैद्य द्वारा आयुर्वेदिक औषधियों से किया जाता है। इसलिए मंदिर परिसर में विशेष शांति बनाए रखी जाती है। परंपरा के तहत मंदिर में घंटियां नहीं बजाई जातीं और किसी प्रकार के निर्माण कार्य भी रोक दिए जाते हैं।

किस देवता को कितने घड़ों से कराया जाता है स्नान

श्रीमंदिर की परंपरा के अनुसार 108 घड़ों के जल का विभाजन इस प्रकार किया जाता है

  • भगवान जगन्नाथ - 35 घड़े
  • भगवान बलभद्र - 33 घड़े
  • देवी सुभद्रा - 22 घड़े
  • भगवान सुदर्शन - 18 घड़े

स्नान की प्रक्रिया में सबसे पहले सुदर्शनजी, फिर बलभद्रजी, उसके बाद सुभद्राजी और अंत में भगवान जगन्नाथ का जलाभिषेक किया जाता है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

देवस्नान पूर्णिमा के अवसर पर पुरी में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है तथा निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क सक्रिय किया गया है।

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