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नवरात्रि अष्टमी हवन महत्व

नवरात्रि अष्टमी पर हवन का शुभ समय और पूरी विधि, जानिए कैसे करें पूजन

नवरात्रि के दौरान अष्टमी की तिथि पर हवन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और व्रत का पारण किया जाता है। इसलिए जान लीजिए इसका शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री


नवरात्रि अष्टमी पर हवन का शुभ समय और पूरी विधि जानिए कैसे करें पूजन

चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस दिन श्रद्धालु हवन करके अपने व्रत का पारण करते हैं। मान्यता है कि हवन के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए अष्टमी और नवमी दोनों ही दिन हवन का खास महत्व होता है। चलिए अब हवन की पूजा सामग्री, शुभ मुहूर्त और आवश्यक सामग्री क्या रहेंगी जान लेते है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हवन से वातावरण शुद्ध होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही इससे मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए कन्या पूजन से पहले हवन करना शुभ माना जाता है।

अष्टमी हवन का शुभ मुहूर्त  

नवरात्रि अष्टमी के दिन हवन के लिए शुभ समय 26 मार्च को सुबह 06:20 बजे से 10:45 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार इन समयों में हवन कर सकते हैं।

हवन के लिए आवश्यक सामग्री

हवन के दौरान निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
हवन कुंड, आम की सूखी लकड़ियां, काला तिल, सूखा नारियल, कलावा और लाल कपड़ा, जौ, चावल, शक्कर, घी, कपूर, गुग्गल, लोबान और पंचमेवा।

हवन करने की विधि

  • सबसे पहले स्वयं और हवन कुंड पर गंगाजल छिड़ककर शुद्धि करें। इसके बाद आम की लकड़ियों में कपूर की सहायता से अग्नि प्रज्वलित करें। फिर “ॐ गण गणपतये नमः स्वाहा” मंत्र के साथ पहली आहुति दें।
  • इसके बाद नवग्रह, कुलदेवता और भगवान शिव को आहुति अर्पित करें। फिर मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हुए 108 बार आहुति दें।
  • अंत में सूखे नारियल में घी भरकर हवन कुंड में रखें, जिसे पूर्णाहुति कहा जाता है। इसके साथ ही हवन संपन्न होता है। इसके बाद माता रानी की आरती करें और कन्या पूजन के पश्चात व्रत खोलें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और आस्था पर आधारित है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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