उज्जैन महाकाल मंदिर में 30 जुलाई से 7 सितंबर तक सभी आरती में पहली बार चलित दर्शन की सुविधा मिलेगी। जानें नई प्रवेश व्यवस्था, भस्म आरती का समय और सवारी की तारीखें।
उज्जैन। श्रावण-भादौ माह में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार विशेष व्यवस्था की गई है। 30 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक महाकालेश्वर मंदिर में पहली बार सभी आरतियों में चलित दर्शन की सुविधा मिलेगी। साथ ही श्रद्धालुओं का प्रवेश त्रिवेणी संग्रहालय और नीलकंठ द्वार से कराया जाएगा, ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, कांवड़ यात्रियों की तरह मंदिर आने वाले सभी श्रद्धालुओं को जल अर्पण करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन और आरती का लाभ दिलाना है।
सभी आरती में मिलेगा चलित दर्शन
श्रावण-भादौ माह के दौरान मंदिर की सभी आरतियों में कार्तिक मंडपम् की पहली तीन पंक्तियों से श्रद्धालुओं को चलित दर्शन कराया जाएगा। इससे पहले यह व्यवस्था सीमित अवसरों पर ही उपलब्ध थी।
भस्म आरती का समय बदला
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार, 30 जुलाई से 7 सितंबर तक प्रतिदिन भस्म आरती सुबह 3 बजे से 5 बजे तक होगी। वहीं प्रत्येक सोमवार को मंदिर के पट सुबह 2:30 बजे खोले जाएंगे और भस्म आरती 2:30 बजे से 4:30 बजे तक संपन्न होगी।
श्रावण-भादौ में निकलेंगी 6 सवारियां
श्रावण और भादौ माह में बाबा महाकाल की कुल 6 सवारियां निकाली जाएंगी। इनमें श्रावण माह में चार और भादौ माह में दो सवारियां शामिल हैं। सवारी का कार्यक्रम इस प्रकार है
- पहली सवारी: 3 अगस्त
- दूसरी सवारी: 10 अगस्त
- तीसरी सवारी: 17 अगस्त
- चौथी सवारी: 24 अगस्त
- पांचवीं सवारी: 31 अगस्त
- राजसी (शाही) सवारी: 7 सितंबर
यह निर्णय महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष एवं उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने की।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित प्रवेश द्वारों का उपयोग करें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि श्रावण-भादौ के दौरान दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।