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Kailash Mansarovar Yatra Resumes After 6 Years via

6 साल बाद शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा, CM धामी ने पहले जत्थे को दिखाई हरी झंडी

6 साल बाद लिपुलेख मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले जत्थे को रवाना किया। 500 श्रद्धालु 10 जत्थों में यात्रा करेंगे।


6 साल बाद शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा cm धामी ने पहले जत्थे को दिखाई हरी झंडी

पिथौरागढ़। छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को टनकपुर से पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पहले दल में 50 श्रद्धालु शामिल हैं, जो निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पिथौरागढ़, धारचूला, गुंजी और नाभीढांग होते हुए तिब्बत (चीन) में प्रवेश करेंगे।

10 जत्थों में करेंगे 500 श्रद्धालु यात्रा

इस वर्ष लिपुलेख मार्ग से कुल 10 जत्थों में 500 श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा करेंगे। प्रत्येक जत्थे में 50 यात्री शामिल होंगे। यात्रा के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और जिला प्रशासन ने आवास, भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और परिवहन सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं।

धारचूला में पारंपरिक स्वागत की तैयारी

यात्रियों के धारचूला पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक छलिया नृत्य के साथ स्वागत किया जाएगा। स्थानीय संस्कृति से परिचित कराने के लिए रात्रिभोज में पहाड़ का प्रसिद्ध व्यंजन झंगोरे की खीर परोसी जाएगी। वहीं नाश्ते में उपमा, पोहा, आलू के पराठे और पुदीने की चटनी जैसी स्थानीय स्वादिष्ट चीजें शामिल रहेंगी।

गुंजी में होगी मेडिकल जांच, फिर चीन में प्रवेश

यात्रा के दौरान 6 जुलाई को पहला दल गुंजी पहुंचेगा, जहां सभी श्रद्धालुओं की अनिवार्य स्वास्थ्य जांच की जाएगी। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुरक्षित यात्रा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे। इसके बाद दल नाभीढांग पहुंचेगा और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 जुलाई को लिपुलेख दर्रे के रास्ते तिब्बत (चीन) में प्रवेश करेगा।

अब पहले से कहीं आसान हुई यात्रा

भारत और चीन की ओर सड़क निर्माण पूरा होने के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पहले की तुलना में काफी सुगम हो गई है। पहले जहां यात्रियों को 60 किलोमीटर से अधिक कठिन पैदल ट्रेक करना पड़ता था, वहीं अब कुल लगभग 38 किलोमीटर ही पैदल चलना होगा। अधिकांश दूरी वाहनों से तय की जाएगी, जिससे बुजुर्ग और पहली बार यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।

सुरक्षा और स्वास्थ्य के विशेष इंतजाम

पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आईटीबीपी संभालेगी। गुंजी और नाभीढांग में डॉक्टरों की टीम, ऑक्सीजन, एंबुलेंस और अन्य चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है, ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। 

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