ज्योतिष के अनुसार 1 अगस्त से शुक्र के कन्या राशि में प्रवेश के साथ राहु के साथ षडाष्टक योग बनने जा रहा है। इस योग से 4 राशियों को कुछ मामलों को लेकर बेहद सतर्कता बरतने की सलाह है।
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के गोचर को महत्वपूर्ण माना जाता है और 1 अगस्त 2026 से बनने वाला शुक्र-राहु का षडाष्टक योग इसी वजह से चर्चा में है। धन, सुख-सुविधा और वैभव के कारक शुक्र सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दौरान कुंभ राशि में पहले से मौजूद राहु के साथ उनकी षडाष्टक स्थिति बनेगी। ज्योतिषीय मान्यता है कि यह योग कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां पैदा कर सकता है।
हालांकि यह सभी लोगों पर समान प्रभाव नहीं डालता। ज्योतिष में राशि, कुंडली और ग्रहों की व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर फल अलग-अलग माने जाते हैं। इसलिए इसे सामान्य ज्योतिषीय आकलन के रूप में देखा जाता है।
षडाष्टक योग का ज्योतिषीय अर्थ
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब दो ग्रह एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव की स्थिति में आते हैं तो षडाष्टक योग बनता है। छठा भाव रोग, ऋण और विरोधियों से जुड़ा माना जाता है, जबकि आठवां भाव अचानक होने वाली घटनाओं, मानसिक दबाव और अप्रत्याशित बदलाव का संकेत देता है। इसी कारण इस योग को चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र और राहु की यह स्थिति भ्रम, अनियोजित खर्च और रिश्तों में गलतफहमियां बढ़ा सकती है।
मेष और सिंह राशि पर संभावित प्रभाव
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक मेष राशि के लोगों को कार्यस्थल पर सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखने की जरूरत होगी। खर्च बढ़ने से आर्थिक योजना प्रभावित हो सकती है और निजी रिश्तों में संवाद बनाए रखना जरूरी रहेगा। वहीं सिंह राशि के जातकों के लिए पारिवारिक मामलों में संयम रखने की सलाह दी गई है। वाणी पर नियंत्रण और लेन-देन में सावधानी बरतना लाभदायक माना गया है।
कन्या और कुंभ राशि वालों के लिए सलाह
कन्या राशि में ही शुक्र का गोचर होने से इस राशि के लोगों को मानसिक तनाव और रिश्तों में सामंजस्य बनाए रखने पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से बचने की भी बात कही गई है। दूसरी ओर कुंभ राशि में राहु की मौजूदगी के कारण अनावश्यक खर्च बढ़ने और जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। ज्योतिषीय मान्यता है कि इस दौरान सोच-समझकर लिए गए आर्थिक फैसले अधिक सुरक्षित रह सकते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं में बताए गए उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार को मां लक्ष्मी को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाकर 'ॐ शुं शुक्राय नमः' मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है। शनिवार को कुत्ते को रोटी खिलाने और पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की भी मान्यता है। इसके अलावा जरूरतमंदों को चावल, दूध, सफेद वस्त्र या तिल का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है।