घर के मंदिर में कैसी मूर्तियां और क्यों नहीं रखनी चाहिए, पूजा की सही दिशा, शुभ धातु की मूर्तियां और वास्तु नियम जानें। भोपाल के ज्योतिषाचार्य के अनुसार पूजा-पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण नियम समझें।
घर में देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित करने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन से भी जुड़ी मानी जाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि पूजा विधिवत और नियमों के अनुसार की जाए, तो घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। भोपाल के ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु शास्त्री पं. हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार पूजा घर की दिशा, मूर्तियों की स्थिति और उनकी स्थिति का मानसिक प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है।
खंडित मूर्तियों की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए
वास्तु शास्त्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि घर के मंदिर में खंडित या टूटी हुई मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। ऐसी मूर्तियों की पूजा करने से मन एकाग्र नहीं रह पाता और ध्यान भटकने की संभावना रहती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूजा के समय यदि ध्यान टूटता है, तो साधना का प्रभाव कम हो जाता है। इसी कारण खंडित मूर्तियों को विसर्जित करने की परंपरा बताई गई है।
पूजा घर की सही दिशा
वास्तु के अनुसार घर का पूजा स्थान उत्तर या पूर्व दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है। इन दिशाओं को सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है, जिससे पूजा का प्रभाव बढ़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा केवल मंत्रोच्चार नहीं, बल्कि ध्यान और भक्ति का संयोजन है। जब व्यक्ति पूर्ण एकाग्रता के साथ पूजा करता है, तो उसका मानसिक संतुलन बेहतर होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
मूर्तियों की संख्या और आकार से जुड़े नियम
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार घर के मंदिर में बहुत बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। सामान्यतः 8 से 10 इंच से बड़ी मूर्तियां घर के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती हैं। साथ ही एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां रखने से भी बचना चाहिए।
शुभ धातु और मूर्तियों का चयन
शास्त्रों में सोना, चांदी, तांबा, पीतल, स्फटिक और पारद से बनी मूर्तियों को शुभ माना गया है। वहीं लोहे, स्टील और एल्यूमीनियम की मूर्तियां पूजा के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती हैं, क्योंकि अभिषेक के दौरान ये धातुएं खराब हो सकती हैं। यदि धातु की मूर्ति संभव न हो, तो मिट्टी या पत्थर की मूर्ति भी शुभ मानी जाती है।
शिवलिंग से जुड़े विशेष नियम
पं. हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार शिवलिंग को भगवान शिव का निराकार स्वरूप माना जाता है, इसलिए खंडित शिवलिंग भी पूजनीय होता है। हालांकि घर में बहुत बड़े शिवलिंग की स्थापना से बचना चाहिए। सामान्यतः अंगूठे के पहले भाग से बड़ा शिवलिंग घर के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।
पूजा घर की नियमित साफ-सफाई और व्यवस्था बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है। गंदगी या अव्यवस्था नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती है, जबकि स्वच्छ वातावरण पूजा के प्रभाव को बढ़ाता है।