आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्र शुरू हुए। उज्जैन, नलखेड़ा और दतिया में तंत्र साधना के लिए साधकों का जमावड़ा होगा।
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से बुधवार, 15 जुलाई से गुप्त नवरात्र की शुरुआत हो गई है। इस बार गुप्त नवरात्र पुष्य नक्षत्र, हर्षल योग, कर्क राशि के चंद्रमा और गजकेसरी योग जैसे शुभ संयोगों में प्रारंभ हुए हैं, जिससे इनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बढ़ गया है। गुप्त नवरात्र 22 जुलाई तक रहेंगे।
उज्जैन, नलखेड़ा और दतिया में रहेगा साधकों का जमावड़ा

गुप्त नवरात्र के दौरान मध्यप्रदेश के उज्जैन, नलखेड़ा और दतिया तंत्र साधना के प्रमुख केंद्र बन जाएंगे। उज्जैन के चक्रतीर्थ और ओखलेश्वर श्मशान, विक्रांत भैरव मंदिर, भैरवगढ़, नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर और दतिया के मां पीतांबरा पीठ में देशभर से तांत्रिक साधक साधना के लिए पहुंचेंगे। वहीं, उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन करेंगे।
साल में चार नवरात्र, दो गुप्त और दो प्रकट
ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार, श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में वर्षभर में चार नवरात्र बताए गए हैं। इनमें आषाढ़ और माघ के नवरात्र गुप्त, जबकि चैत्र और अश्विन के नवरात्र प्रकट नवरात्र कहलाते हैं। गुप्त नवरात्र को तंत्र साधना, उपासना और गुप्त विद्याओं की सिद्धि के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।
दो सर्वार्थ सिद्धि और तीन रवि योग का संयोग
इस बार गुप्त नवरात्र के दौरान दो सर्वार्थ सिद्धि योग और तीन रवि योग बन रहे हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में नए कार्य शुरू करना, व्यापार विस्तार, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी और अन्य शुभ कार्य करना लाभकारी माना जाता है। 22 जुलाई को गुप्त नवरात्र का समापन होगा। इसी दिन भड्डली नवमी भी रहेगी, जिसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। हालांकि गुरु तारा अस्त होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे।
रात 12 से सुबह 4 बजे तक होती है तंत्र साधना
तंत्र साधना मुख्य रूप से वैदिक तंत्र और अघोर तंत्र परंपरा के अनुसार की जाती है। वैदिक साधक गुरु परंपरा के अनुसार साधना करते हैं, जबकि अघोर पंथ के साधक श्मशानों में साधना करते हैं। गुप्त नवरात्र के दौरान यह साधना प्रतिदिन मध्यरात्रि 12 बजे से सुबह 4 बजे तक निशांत वेला और ब्रह्म मुहूर्त में की जाती है।
सामान्य श्रद्धालु भी कर सकते हैं माता की आराधना
जो लोग तंत्र साधना नहीं करते, वे भी गुप्त नवरात्र में माता दुर्गा की विशेष उपासना कर सकते हैं। दुर्गा सप्तशती, दुर्गा कवच, रात्रि सूक्त और देवी मंत्रों का पाठ कर श्रद्धालु माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
उज्जैन को माना जाता है सिद्धि का प्रमुख केंद्र
तांत्रिक भय्यू महाराज के अनुसार उज्जैन में गढ़कालिका, हरसिद्धि, महाकाल क्षेत्र, चक्रतीर्थ और ओखलेश्वर श्मशान में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। शिव और शक्ति की संयुक्त उपस्थिति के कारण उज्जैन को तंत्र साधना और सिद्धि प्राप्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां साधक व्यापार वृद्धि, बाधा निवारण और विभिन्न प्रकार की सिद्धियों के लिए नौ दिनों तक साधना करते हैं।