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भजन गायक पर नोटों की बारिश

नोटों की बारिश में ढंका भजन गायक जिग्नेश कविराज, जानिए क्या है गुजरात की ‘लोक-डायरो’ परंपरा

गुजरात के जूनागढ़ में लोक-डायरो कार्यक्रम के दौरान भजन गायक जिग्नेश कविराज पर नोटों की बारिश हुई। दान की यह राशि कन्या शिक्षा के लिए इस्तेमाल की जाएगी।


नोटों की बारिश में ढंका भजन गायक जिग्नेश कविराज जानिए क्या है गुजरात की ‘लोक-डायरो’ परंपरा

गुजरात के जूनागढ़ जिले में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तहत आयोजित लोक-डायरो में मशहूर भजन गायक Jignesh Kaviraj पर भक्तों ने नोटों की जमकर बारिश की। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस कार्यक्रम में मंच नोटों से ढक गया और इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह कार्यक्रम खंभालिया गांव में आयोजित किया गया था, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद थे। कुछ लोग तो नोटों की बोरियां लेकर भी पहुंचे थे।

लोक-डायरो में क्या हुआ पूरा मामला?

दरअसल, लोक-डायरो गुजरात की एक पारंपरिक भजन संध्या है, जिसमें धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के लिए दान इकट्ठा किया जाता है। इस कार्यक्रम में भजन और कीर्तन के दौरान लोग कलाकारों पर खुले दिल से दान बरसाते हैं। जूनागढ़ में हुए इस आयोजन में भी यही दृश्य देखने को मिला। भक्तों ने गायक पर लगातार नोट बरसाए, जिससे पूरा मंच कुछ ही देर में पैसे से भर गया।

दान की राशि कहां जाएगी?

आयोजकों के मुताबिक यह पूरा कार्यक्रम श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तहत किया गया था। इसमें जो भी दान एकत्र हुआ है, उसे सामाजिक कार्यों में खर्च किया जाएगा। विशेष रूप से यह राशि अहमदाबाद में बन रहे ‘गुजरात अहीर समाज कन्या कक्षालय’ के निर्माण में इस्तेमाल होगी। इसका उद्देश्य बेटियों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य को बढ़ावा देना है।

क्यों खास है लोक-डायरो की परंपरा?

गुजरात में लोक-डायरो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक दान परंपरा भी है। इसमें जुटाई गई राशि का उपयोग स्कूल, गोशाला, और जरूरतमंदों की शादी जैसे सामाजिक कार्यों में किया जाता है।यही वजह है कि लोग इसे सिर्फ भजन कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामुदायिक सहयोग का माध्यम मानते हैं। इस परंपरा में कलाकार भी समाज सेवा के एक बड़े उद्देश्य से जुड़ते हैं।

Jignesh Kaviraj का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई लोग इसे भक्ति और दान की परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सांस्कृतिक अनोखी परंपरा बता रहे हैं। फिलहाल यह आयोजन एक बार फिर चर्चा में है और गुजरात की लोक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ले आया है।

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