क्या बीमारी या दवा लेने के दौरान एकादशी व्रत रखना सही है? जानिए शास्त्रों के नियम, एकादशी में क्या करें और क्या नहीं।
एकादशी, भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत हिंदू धर्म में बेहद पुण्यदायी माना जाता है. लेकिन हर साल कई लोग एक ही सवाल को लेकर दुविधा में रहते हैं अगर कोई बीमार हो या दवाइयां चल रही हों, तो क्या एकादशी व्रत रखा जा सकता है? और क्या दवा लेने से व्रत टूट जाता है?
दरअसल, धर्म शास्त्रों में व्रत के साथ स्वास्थ्य को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए बीमारी की स्थिति में नियमों को समझना जरूरी हो जाता है।
क्या दवा लेने से टूट जाता है एकादशी व्रत?
धर्म ग्रंथों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य कारणों से दवा ले रहा है, तो वह दवाइयों का सेवन कर सकता है। इसे व्रत भंग नहीं माना जाता, खासकर तब जब दवा लेना जरूरी हो शास्त्रों में कहा गया है कि शरीर स्वस्थ रहेगा तभी भक्ति और साधना संभव है। ऐसे में स्वास्थ्य की अनदेखी करना उचित नहीं माना गया, अगर डॉक्टर ने भोजन के साथ दवा लेने की सलाह दी है, तो व्यक्ति फलाहार के साथ व्रत कर सकता है।
बीमारी में निर्जला व्रत जरूरी नहीं
यही सवाल अब कई लोगों के मन में उठता है कि क्या बीमार व्यक्ति को निर्जला व्रत रखना चाहिए? शास्त्रों के अनुसार बीमारी की स्थिति में निर्जला व्रत अनिवार्य नहीं है। ऐसे लोग फलाहार कर सकते हैं, दूध या हल्का भोजन ले सकते हैं. जरूरत पड़ने पर व्रत छोड़ भी सकते हैं यह नियम बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर भी लागू होता है।
अगर तबीयत बिगड़ जाए तो क्या करें?
धर्माचार्यों के मुताबिक यदि व्रत के दौरान किसी की तबीयत खराब होने लगे, कमजोरी महसूस हो या स्वास्थ्य संकट की स्थिति बने, तो तुरंत व्रत खोल देना चाहिए।
अब समझिए… शास्त्रों में भक्ति को महत्व दिया गया है, शरीर को कष्ट देकर खुद को नुकसान पहुंचाना नहीं। ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु से क्षमा प्रार्थना करके व्रत तोड़ा जा सकता है। इससे कोई दोष नहीं लगता।
एकादशी व्रत के क्या लाभ बताए गए हैं?
हिंदू मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत मानसिक शांति देता है, पापों से मुक्ति दिलाता है, भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. भक्ति और आध्यात्मिक विकास में मदद करता है. कई लोग इसे शरीर और मन की शुद्धि का भी माध्यम मानते हैं।
एकादशी व्रत के जरूरी नियम
एकादशी व्रत करते समय कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए
- एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए
- तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए
- तुलसी में जल अर्पित नहीं किया जाता
- भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल जरूर चढ़ाएं
- अगले दिन पारण सूर्योदय के बाद करें
एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा और संयम के साथ किया गया व्रत बेहद शुभ माना जाता है।