क्या आप भी महाअष्टमी और राम नवमी की सही तिथि को लेकर कंफ्यूज हैं, जान लीजिए इसकी सही डेट और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त..
चैत्र नवरात्र 19 मार्च से चल रहे हैं और 27 मार्च को खत्म हो जाएंगे। लेकिन इस साल लोगों में अष्टमी और राम नवमी की तिथि लेकर कंफ्यूजन है। लेकिन परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको इसकी सही तिथि और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त बताएंगे।

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। खास तौर से इस दौरान अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व होता है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है और नवमी वाले दिन भगवान राम की पूजा की जाती है और इसे भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। अब इसकी सही तिथि जान लेते हैं।
कब है महाअष्टमी और राम नवमी?
पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी 26 मार्च, गुरुवार को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि 25 मार्च दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च सुबह 11:48 बजे तक रहेगी।
वहीं राम नवमी 27 मार्च, शुक्रवार को मनाई जाएगी। नवमी तिथि 26 मार्च सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च सुबह 10:06 बजे तक रहेगी।

महाअष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
महाअष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी, इस दिन कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 6:17 बजे से शुरू होगा और 7:51 बजे तक रहेगा। अगर आप इस मुहूर्त में कन्या पूजन नहीं कर सके, तो दूसरा मुहूर्त सुबह 10:56 बजे से शुरू होगा, जो दोपहर 3:32 बजे तक रहेगा।

राम नवमी पर कन्या पूजन और शुभ योग
राम नवमी के दिन सुबह 6:17 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा, जो बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा। लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 7:50 बजे से 9:22 बजे तक रहेगा, जबकि रवि योग पूरे दिन बना रहेगा। इस दौरान भी कन्या पूजन किया जा सकता है।

अष्टमी-नवमी पर क्या करें?
अष्टमी के दिन 2 से 10 साल की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन करें और भोजन कराएं। अष्टमी और नवमी के बीच का समय संधि काल कहलाता है, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान दीपक जलाकर माता चामुंडा का ध्यान करने से कष्ट दूर होते हैं। राम नवमी के दिन घर में हवन करना शुभ होता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।

क्या न करें?
नवरात्रि के दिनों में तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए, जैसे मांस और शराब का सेवन न करें और सात्विक आहार ही ग्रहण करें। राम नवमी पर भगवान राम को तुलसी अर्पित करें, लेकिन नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए। साथ ही ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करना शुभ माना जाता है, देर तक सोने से पूजा का फल कम हो सकता है।