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Chaiti Chhath 2026: Dates, Rituals & Significance

सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ

चैती छठ 2026 का महापर्व 22 से 25 मार्च तक मनाया जाएगा। जानिए नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य की पूरी विधि और धार्मिक महत्व।


सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ

मुकेश ऋषि

भारत धर्म प्रधान देश है। मा यहां धर्म कर्म ही जन-जन का प्राण है। ऐसे भारत त्योहारों का देश है। यहां भारतीय संस्कृति के अंतगर्त प्रति रोज त्योहारों का क्रम चलता रहता है। कभी होली, दिवाली, रक्षाबंधन, एकादशी, देवत्थान, गंगास्नान को श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसी श्रृंखला के अंतर्गत काफी लोकप्रिय त्योहार है छठ महापर्व छठ का त्योहार सूर्योपासना का पर्व है। छठ का त्योहार सूर्य की आराधना का पर्व है, प्रातःकाल में सूर्य की पहली किरण और सांयकाल में सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है। सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। सुख-स्मृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का यह त्योहार सभी समान रूप से मनाते हैं। 

प्राचीन धार्मिक संदर्भ में यदि इस पर दृष्टि डाले तो पाएंगे कि छठ पूजा का आरंभ महाभारत काल के समय से देखा जा सकता है। छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है तथा गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर के किनारे पानी में खड़े होकर यह पूजा संपन्न की जाती है। आस्था का महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये पर्व चैत्र महीने और कार्तिक के महीने में काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व पर साफ-सफाई का खास ख्याल रखा जाता है। इस व्रत को करने के नियम काफी कठिन होते हैं। इसी कारण इसे महापर्व कहा जाता है। इस पर्व को पूरी सावधानी के साथ किया जाता है। जरा सी भी गलती काफी अशुभ मानी जाती है।

 चैती छठ 22 मार्च से शुरू होकर 25 मार्च तक चलेगा। 22 मार्च 2026 रविवार को चतुर्थी के दिन नहाय-खाय किया जाएगा। 23 मार्च 2026 सोमवार को पंचमी तिथि में खरना होगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम में गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाकर सूर्य देव की पूजा करने के बाद इसी प्रसाद के साथ कुछ खाया जाता है। 24 मार्च 2026 मंगलवार के दिन षष्ठी तिथि में सांयकाल को सूर्य देवता को अर्घ्य दिया जाएगा। शाम के समय नदी या तालाब में व्रती खड़ी होती हैं और सूर्य भगवान से प्रार्थना करती हैं। फिर एक निश्चित समय पर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाता है। 25 मार्च 2026 बुधवार को सप्तमी तिथि में सूर्य देव को सुबह का अर्घ्य दिया जाएगा। इस दिन भी महिलाएं सूर्योदय से पहले ही नदी या तालाब में प्रार्थना के लिए खड़ी होती हैं।

फिर जैसे ही सूर्योदय होता है, सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रती कुछ खाकर अपना व्रत तोड़ती हैं। इस प्रकार छठ का त्योहार संपन्न होता है। इस पर्व में विशेष रूप से छठी मैया की पूजा की जाती है, शास्त्रों के मुताबिक छठी माता भगवान सूर्य की मानस बहन हैं और उनकी पूजा करने से सूर्यदेव को प्रसन्न किया जा सकता है। ये भी कहा जाता है कि षष्ठी मां यानी छठी मैया बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं। इस व्रत का नियमपूर्वक पालन करने से संतान की लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार में मनाया जाता है। इस पर्व की धूम देश से लेकर विदेश में भी दिखाई देती है। इसमें महिलाएं 36 घंटे तक लंबा व्रत करती हैं। यह पर्व चार दिनों तक चलता है। इसलिए यह व्रत काफी कठिन माना जाता है। सूर्यदेव की आराधना से आरोग्य का संवर्द्धन होता है। इसमें उगते हुए सूर्य का अर्घ्य दिया जाता है।

 

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