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शुरू हो गयपुरुषोत्तम मास, जानें क्या करें

शुरू हो गया पुरुषोत्तम मास, जानिए 15 जून तक क्या करें और किन कामों से बचना चाहिए?

17 मई से पुरुषोत्तम मास यानी अधिकमास शुरू हो रहा है। इस पूरे महीने भगवान विष्णु की पूजा, दान और जप का विशेष महत्व रहेगा। जानिए 15 जून तक किन शुभ कामों से बचना चाहिए।


शुरू हो गया पुरुषोत्तम मास जानिए 15 जून तक क्या करें और किन कामों से बचना चाहिए

AI Image

17 मई 2026 से अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास की शुरुआत हो रही है। यह पवित्र महीना 15 जून तक रहेगा। हिंदू  धर्म में इसे बेहद खास माना जाता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दौरान पूजा-पाठ, दान और भक्ति का फल कई गुना बढ़ जाता है।

दरअसल, अधिकमास हर साल नहीं आता। चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच समय का संतुलन बनाए रखने के लिए इसे जोड़ा जाता है।  लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व सिर्फ गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आत्मचिंतन और साधना का महीना माना जाता है।

पुरुषोत्तम मास में क्या करना शुभ माना जाता है?

इस पूरे महीने भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व रहता है। श्रद्धालु विष्णु सहस्रनाम का पाठ, सत्यनारायण कथा और  मंत्र जाप करते हैं। खासकर “ऊं नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप शुभ माना गया है।

ऐसे में दान-पुण्य को भी बेहद फलदायी माना जाता है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दीप दान करने से पुण्य मिलता है। धार्मिक ग्रंथों का पाठ और सात्विक जीवनशैली अपनाने की भी सलाह दी जाती है।

किन कामों से बचने की सलाह दी जाती है?

अधिकमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए कारोबार की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य करने से बचने की परंपरा है।

अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों? धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यह महीना भौतिक सुख-सुविधाओं से थोड़ा दूर रहकर आध्यात्मिक साधना पर ध्यान देने का समय माना जाता है। इसलिए नई खरीदारी, नया घर या वाहन लेने जैसे बड़े फैसले टालने की सलाह दी जाती है।

पूरे महीने व्रत रखने वालों के लिए क्या नियम हैं?

जो लोग पुरुषोत्तम मास का व्रत रखते हैं, उन्हें सात्विक भोजन करने और संयमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी जाती है। कई श्रद्धालु दिन में एक समय भोजन करते हैं और प्याज, लहसुन व मांसाहार से दूरी बनाते हैं।

फिलहाल मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भी पुरुषोत्तम मास को लेकर विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं। माना जाता है कि इस महीने सच्चे मन से की गई भक्ति व्यक्ति के मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक ऊर्जा दोनों को मजबूत करती है।

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