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Vedic Clock Installed at Kashi Vishwanath Temple

बाबा विश्वनाथ के आंगन में लगी वैदिक घड़ी: अब नक्षत्र, योग और 30 मुहूर्तों की सटीक जानकारी एक ही जगह

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में दुनिया की पहली 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' स्थापित की गई है। यह पहल प्राचीन भारतीय समय-गणना को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ती है।


बाबा विश्वनाथ के आंगन में लगी वैदिक घड़ी अब नक्षत्र योग और 30 मुहूर्तों की सटीक जानकारी एक ही जगह

Kashi Vishwanath Temple में अब श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ भारतीय कालगणना का भी सटीक अनुभव मिलेगा। मंदिर परिसर के चौक क्षेत्र में ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ स्थापित कर दी गई है, जिसे रविवार को औपचारिक रूप से चालू किया गया।

उज्जैन के बाद वाराणसी बना दूसरा केंद्र

Ujjain के बाद Varanasi देश का दूसरा प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया है, जहां यह अनूठी घड़ी स्थापित की गई है। यह पहल भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक कालगणना प्रणाली को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

30 मुहूर्त, नक्षत्र और पंचांग की पूरी जानकारी

यह वैदिक घड़ी केवल समय बताने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए श्रद्धालु दिन के 30 मुहूर्तों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही नक्षत्र, योग, व्रत, त्योहार, तिथि और ग्रहों की स्थिति जैसी पंचांग से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध होगी। घड़ी सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर संचालित होती है, जिससे स्थान विशेष के अनुसार सटीक कालगणना संभव हो पाती है।

700 किलो वजनी घड़ी, भव्य कार्यक्रम में समर्पित

करीब 700 किलोग्राम वजनी इस घड़ी को मध्यप्रदेश सरकार की ओर से काशी को भेंट किया गया। एक विशेष कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की उपस्थिति में बाबा विश्वनाथ को समर्पित किया। यह आयोजन ‘सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य’ के अवसर पर हुआ, जिसका उद्देश्य सम्राट विक्रमादित्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना है। इस पहल को Madhya Pradesh और Uttar Pradesh के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों के मजबूत होने के रूप में भी देखा जा रहा है। उज्जैन और काशी, दोनों ही ज्योतिर्लिंग स्थल हैं, जिनका धार्मिक महत्व सदियों पुराना है।

आधुनिक तकनीक से जुड़ी प्राचीन परंपरा

इस घड़ी को Maharaja Vikramaditya Research Institute, उज्जैन द्वारा विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय कालगणना की प्राचीन प्रणाली को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पुनर्जीवित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय खगोल विज्ञान और समय गणना की परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

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