उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद शुरू हो चुकी है। इसके लिए MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। साथ ही 48 घंटे में भुगतान का दावा, 2 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया पंजीकरण।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद का सीजन शुरू हो गया है। इस बार सरकार ने शुरुआत से ही कुछ बड़े दावे किए हैं। किसानों को समय पर भुगतान, बेहतर सुविधाएं और खरीद-बिक्री के लिए सबकुछ ऑनलाइन सिस्टम होगा। सुनने में सब कुछ थोड़ा अलग नजर आ रहा है।
दरअसल, सोमवार से शुरू हुई इस प्रक्रिया में पहले ही सवा दो लाख से ज्यादा किसान पंजीकरण करा चुके हैं। यह बताता है कि इस बार तैयारी पहले से तेज रही।
MSP बढ़ने से किसानों को सीधा फायदा
इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। पिछले साल के मुकाबले इसमें 160 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। यानी सीधे तौर पर किसानों की आमदनी में इजाफा होगा। इसको लेकर सरकार का कहना है कि यह फैसला लागत बढ़ने और किसानों को राहत देने के लिए लिया गया है।
48 घंटे में भुगतान का दावा
सबसे बड़ा बदलाव इस बार किसानों किए जाने वाले भुगतान को लेकर है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसानों को डीबीटी के जरिए 48 घंटे के भीतर भुगतान किया जाए। अगर यह जमीन पर सही तरीके से लागू हुआ, तो किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब तक के समय में यह बड़ी समस्या हुआ करती थी।
पूरे प्रदेश में क्रय केंद्र तैयार
अब तक 3574 क्रय केंद्र बनाए जा चुके हैं, जबकि कुल मिलाकर करीब 6500 केंद्र स्थापित किए जाएंगे। खाद्य विभाग समेत 8 एजेंसियां इस खरीद प्रक्रिया में शामिल हैं।
15 जून तक चलेगी खरीद
सरकार ने साफ किया है कि यह प्रक्रिया 15 जून तक जारी रहेगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ ले सकें। मौसम को देखते हुए क्रय केंद्रों पर खास इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें छाया और पीने के पानी की व्यवस्था, बैठने की सुविधा, उतराई, छनाई और सफाई के लिए ₹20 प्रति क्विंटल अलग से देने होंगे। यानी कोशिश यह है कि किसान को सिर्फ अनाज बेचने तक सीमित परेशानी हो, बाकी चीजें आसान रहें।
बिचौलियों पर रोक, सिस्टम ऑनलाइन
इस बार खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसान सीधे सिस्टम से जुड़ पाएंगे।
कैसे करें पंजीकरण?
fcs.up.gov.in वेबसाइट
यूपी किसान मित्र ऐप
टोल फ्री नंबर: 18001800150
लक्ष्य भी बढ़ा
पहले 30 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। इससे साफ है कि सरकार इस बार ज्यादा खरीद करने के मूड में है।