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UP Voter List 2026: 2.4 Cr Removed, 84 Lakh Added

यूपी वोटर लिस्ट का बड़ा गणित: 2.4 करोड़ नाम कटे, फिर भी 84 लाख बढ़े मतदाता, जानें कैसे?

उत्तर प्रदेश की अंतिम वोटर लिस्ट जारी, 2.4 करोड़ नाम हटे फिर भी 84 लाख नए मतदाता जुड़े। जानिए एसआईआर प्रक्रिया का पूरा गणित और कैसे बढ़ी कुल वोटर्स की संख्या।


यूपी वोटर लिस्ट का बड़ा गणित 24 करोड़ नाम कटे फिर भी 84 लाख बढ़े मतदाता जानें कैसे

UP Voter list Updates voters Increase |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने सभी को चौंका दिया है। एक तरफ जहां करोड़ों वोटर्स के नाम हटाए गए हैं। वहीं, दूसरी ओर कुल मतदाताओं की संख्या में वृद्धि भी दर्ज की गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर यह गणित कैसे काम करता है। जानिए इसका पूरा गणित।

अंतिम मतदाता संख्या क्या है

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए इस पुनरीक्षण के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 पहुंच गई है। नवदीप रिणवा ने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी। इसमें 7.30 करोड़ पुरुष और 6.09 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं।

2.4 करोड़ नाम क्यों कटे?

अंतिम सूची से करीब 2 करोड़ 4 लाख 45 हजार 300 मतदाताओं के नाम हटाए गए। ये नाम विभिन्न कारणों से हटे हैं।  इनमें से कुछ कारण जैसे मृत्यु होना, स्थान परिवर्तन होना, डुप्लीकेट एंट्री और सत्यापन में त्रुटियां शामिल है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए की जाती है।

फिर भी 84 लाख वोटर्स कैसे बढ़े

यहीं पर पूरा गणित समझना जरूरी है। जानकारी के अनुसार, अक्टूबर में जब सूची फ्रीज हुई थी। तब कुल मतदाता लगभग 15.44 करोड़ थे। इसके बाद 6 जनवरी को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर करीब 12.55 करोड़ रह गई। इस दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। लेकिन इसके बाद की प्रक्रिया में नए मतदाताओं का पंजीकरण हुआ। इसमें 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को जोड़ा गया। इतना ही नहीं सुधार प्रक्रिया के तहत सही नाम शामिल किए गए। इन्हीं कारणों से अंतिम सूची में 13.39 करोड़ मतदाता दर्ज हुए, जो ड्राफ्ट लिस्ट से करीब 84.28 लाख अधिक हैं।

क्या है SIR प्रक्रिया का उद्देश्य

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और त्रुटिरहित बनाना होता है। इसके तहत घर-घर सत्यापन, दस्तावेज जांच और नए मतदाताओं का पंजीकरण किया जाता है।

चुनावी दृष्टि से क्यों अहम

मतदाता सूची में इस तरह के बदलाव आगामी चुनावों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। साफ और सटीक वोटर डेटा से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनती है।

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