तालिबान ने नया कानून पेश कर महिलाओं की पिटाई को वैध बताया है। हड्डी न टूटे तो घरेलू हिंसा नहीं मानी जाएगी
'आपातकाल और युवा' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा
भोपाल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा कि इस देश का समाज तानाशाहों को सहन नहीं करता है। आपातकाल की घटना सिखाती है कि समाज के रक्त में लोकतंत्र है, जनतंत्र है, उसे दबाने को कोशिश कने वाला मिट्टी में मिल जाएगा।
श्री जोशी आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 'आपातकाल और युवा' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विमर्श में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। गुरुवार को हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी संवाद समिति और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में श्री जोशी ने कहा कि यहां शायद ही कुछ लोग होंगे, जिन्होंने आपातकाल का अनुभव किया है और बहुत से लोग हैं, जिन्होंने उस घटना के बारे में सुना है। जिन्होंने अनुभव किया, उनके लिए स्मृति से कई बातों को हटाना असंभव है। उन्होंने कहा कि सब प्रकार के जनतंत्र द्वारा प्राप्त अधिकारों का हनन करते हुए केवल और केवल एक व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति के लिए उसने यह सब कानून बनाया।
अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर इस देश के लोकतंत्र को समाप्त करने का एक वेदनादायक कदम उठाया। जो कानून लाया गया, उसे मीसा के नाम से जाना जाता है। बावजूद इसके इस देश का युवा वर्ग अपनी सूझ-बूझ के साथ खड़ा हुआ और काले कानून से मुक्त होते हुए मूल परम्पराओं के साथ चलना प्रारंभकिया।
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर के साथ उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संगोष्ठी को संबोधित किया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सैम ग्रुप के चेयरमैन डॉ. हरप्रीत सलूजा ने दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निवेदिता शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के क्षेत्रीय संपादक एवं मप्र ब्यूरो प्रमुख डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर कुलाधिपति प्रीति सलूजा सहित प्राध्यापक, सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे.
आपातकाल में हुआ लोकतंत्र का अपहरणः उप मुख्यमंत्री शुक्ल
उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आपातकाल में लोकतंत्र का अपहरण हुआ था। इस विषय में जानने की सबसे ज्यादा जरूरत युवाओं को है, क्योंकि लोकतंत्र लंबे समय के संघर्ष के बाद स्थापित हुआ और देश की बेहतरी के लिए हुआ था, देश को फिर से विश्व गुरु के स्थान पर पहुंचाकर दुनिया का नेतृत्व करने के लिए हुआ था, जिससे दुनिया में शांति की स्थापना हो सकें और हम लोकतंत्र को अमर बना सकें।
आपातकाल की कल्पना करते ही शरीर में सिहरन पैदा हो जाती हैः सोनी
पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी ने 25 जून 1975 की रात को भारतीय लोकतंत्र का 'काला अध्याय' बताया। उन्होंने कहा कि उस समय संविधान की आत्मा पर प्रहार किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल दिया गया। आपातकाल की कल्पना करते ही आज भी शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है, क्योंकि मैंने उस दौर को स्वयं भोगा है। उन्होंने नई पीढ़ी को लोकतंत्र के संघर्षमय इतिहास से अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया।