सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों मामले में उमर खालिद की समीक्षा याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा आरोपों में प्रथम दृष्टया दम है, फिलहाल जमानत पर कोई राहत नहीं।
साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कार्यकर्ता उमर खालिद को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी जमानत से जुड़े फैसले की समीक्षा याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल उन्हें जमानत नहीं मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने 16 अप्रैल के आदेश में कहा कि समीक्षा याचिका में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे 5 जनवरी 2026 के फैसले पर दोबारा विचार किया जा सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तुत दस्तावेजों में किसी प्रकार की त्रुटि या न्यायिक चूक नहीं पाई गई।
अदालत ने अपने पहले के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि आरोपों में प्रथम दृष्टया दम नजर आता है। इससे पहले 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट का मानना था कि मामले में साजिश के गंभीर आरोप हैं, जिनकी गहन जांच आवश्यक है।
दंगों की पृष्ठभूमि
यह मामला 2020 दिल्ली दंगे से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध के दौरान भड़की थी। अदालत ने कहा कि मामले में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अन्य आरोपियों की स्थिति
दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज इस मामले में कुल 18 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से 11 को अब तक जमानत मिल चुकी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि सभी आरोपियों की परिस्थितियां समान नहीं हैं, इसलिए हर मामले का मूल्यांकन अलग-अलग किया जाएगा।
खुली सुनवाई की मांग भी खारिज
उमर खालिद की ओर से समीक्षा याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने इसे भी ठुकरा दिया। अदालत ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं आमतौर पर चेंबर में ही सुनी जाती हैं और खुली सुनवाई आवश्यक नहीं होती।