राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग हुई है। मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ा मामला एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। मेघालय सरकार ने आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले निचली अदालत से राहत मिलने के बाद हाई कोर्ट ने भी जमानत को बरकरार रखा था, जिसके बाद अब यह कानूनी लड़ाई तीसरे और सबसे अहम चरण में पहुंच गई है।
यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि लगातार बदलते न्यायिक फैसलों की एक लंबी कानूनी जंग बन चुका है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि सोनम की जमानत रद्द की जाए, जबकि इससे पहले हाई कोर्ट ने पुलिस प्रक्रिया में हुई कथित त्रुटियों का हवाला देते हुए राहत दी थी।
जमानत को लेकर क्यों शुरू हुआ नया विवाद
मेघालय हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि गिरफ्तारी के शुरुआती चरण में आरोपी को उसके अधिकारों और आरोपों की सही जानकारी नहीं दी गई थी। इसी आधार पर कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 22(1) और बीएनएसएस की धारा 47(1) के उल्लंघन से जोड़ा था। इसी तकनीकी आधार पर सोनम को राहत मिली थी, जिसे अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी कानूनी बहस
हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या प्रक्रिया में हुई चूक किसी गंभीर आपराधिक मामले में जमानत का आधार बन सकती है। इसी कानूनी प्रश्न को अब सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया है, जहां सॉलिसिटर जनरल ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है। अदालत ने संकेत दिया है कि अपील पर विचार किया जाएगा।
हत्या केस से जुड़े आरोप और जांच की पृष्ठभूमि
इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी पर है। आरोप है कि हनीमून के दौरान शिलॉन्ग में पति की हत्या की साजिश रची गई। जांच में यह भी दावा किया गया कि इस वारदात में सोनम के कथित प्रेमी और कुछ अन्य लोगों की भूमिका सामने आई थी।
जमानत के बाद भी जारी कानूनी निगरानी
करीब एक साल जेल में रहने के बाद सोनम को शिलॉन्ग की स्थानीय अदालत से जमानत मिली थी। हालांकि यह मामला अब भी अदालतों में विचाराधीन है और सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बाद इसकी कानूनी दिशा एक बार फिर बदल सकती है। राज्य सरकार की अपील के बाद अब नजर शीर्ष अदालत के फैसले पर टिकी है, जो इस पूरे मामले की आगे की दिशा तय कर सकता है।