Breaking News
  • धार के भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा
  • MP में पुलिसकर्मियों को 15 दिन में मिलेगा कार्यवाहक उच्च पद प्रभार
  • हिमंता बिस्वा सरमा दूसरी बार असम के CM: 2 बीजेपी और 2 सहयोगी दलों से मंत्री बने
  • देश में मानसून तय समय से 4 दिन पहले दस्तक दे सकता है
  • NEET का पेपर लीक, परीक्षा रद्द हो गई, जांच CBI करेगी

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश

Sidhi Girl Became Collector

25 मिनट की ‘कलेक्टर’ बनी छात्रा ने बदल दी गांव की तस्वीर, पहले आदेश से 40 घरों में पहुंची बिजली

सीधी की चौथी कक्षा की छात्रा 25 मिनट के लिए कलेक्टर बनी और उसके पहले आदेश से आदिवासी गांव के 40 घरों में बिजली पहुंच गई। अब सड़क निर्माण की तैयारी भी शुरू हो गई है।


25 मिनट की ‘कलेक्टर’ बनी छात्रा ने बदल दी गांव की तस्वीर पहले आदेश से 40 घरों में पहुंची बिजली

Sidhi News |

सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक चौथी कक्षा की छात्रा ने वह कर दिखाया, जिसका इंतजार गांव के लोग वर्षों से कर रहे थे। आदिवासी बहुल छड़हुला टोला में पहली बार बिजली पहुंची और इसकी वजह बनी छोटी बच्ची सरस्वती सिंह। जनचौपाल के दौरान कलेक्टर विकास मिश्रा ने छात्रा से बातचीत की। सरस्वती ने 20 का पहाड़ा सुनाया और फिर गांव की सबसे बड़ी समस्या बताई।

छोटी बच्ची ने कहा कि बिजली नहीं होने से रात में पढ़ाई नहीं हो पाती। यही बात कलेक्टर को छू गई और उन्होंने सरस्वती को 25 मिनट के लिए ‘कलेक्टर’ बना दिया।

पहला आदेश और तुरंत असर

‘कलेक्टर’ बनते ही सरस्वती ने सबसे पहला आदेश गांव में बिजली पहुंचाने का दिया। उसने अधिकारियों को 15 दिन के भीतर काम पूरा करने को कहा। प्रशासन ने तय समय से पहले काम पूरा कर दिया। सिर्फ 13 दिन में गांव के 40 घरों में बिजली पहुंच गई। जिस गांव में कभी लालटेन और लकड़ी की रोशनी होती थी, वहां अब बल्ब जलने लगे हैं।

गांव में ऐसे मनाया गया जश्न

जब पहली बार गांव में बिजली आई तो लोगों ने बल्ब के पास फूल और अक्षत चढ़ाकर स्वागत किया। सरस्वती ने खुद स्विच दबाकर गांव में रोशनी का शुभारंभ किया। इस दौरान ग्रामीणों ने उसका फूलों से स्वागत किया। बच्चों में सबसे ज्यादा खुशी दिखी क्योंकि अब उन्हें रात में पढ़ाई करने में दिक्कत नहीं होगी।

सड़क का काम भी शुरू

सरस्वती ने सिर्फ बिजली ही नहीं, गांव की सड़क बनाने का मुद्दा भी उठाया था। प्रशासन के मुताबिक सड़क निर्माण के लिए सर्वे पूरा हो चुका है और जून तक काम शुरू होने की तैयारी है। जनपद पंचायत कुसमी के अधिकारियों का कहना है कि गांव में बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जाएंगी।

प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल

छड़हुला टोला की आबादी करीब 200 से ज्यादा है। लंबे समय से गांव बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित था। इस पूरे घटनाक्रम ने दिखाया कि अगर प्रशासन और जनता के बीच संवाद मजबूत हो तो छोटी पहल भी बड़ा बदलाव ला सकती है। सरस्वती का 25 मिनट का ‘कलेक्टर कार्यकाल’ अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Related to this topic: