शिवपुरी में नो-एंट्री जोन में भारी वाहनों की खुलेआम एंट्री से हादसों का खतरा बढ़ गया है। लोगों ने यातायात पुलिस पर लापरवाही और कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए।
राजेंद्र जैन
शिवपुरी शहर में नो-एंट्री नियम अब सिर्फ बोर्डों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं। दिन हो या रात भारी वाहन खुलेआम शहर के भीतर फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं, हालात ऐसे बन चुके हैं कि हर गुजरता ट्रक और बस लोगों के लिए खतरे का संकेत बनता जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिम्मेदार कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
बीती रात एक यात्री बस का शहर के भीतर घुसना और फिर बीच सड़क पर बैक होकर लौटना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर गया,करीब आधे घंटे तक कमलागंज इलाके में जाम लगा रहा, लेकिन मौके पर कोई यातायातकर्मी नजर नहीं आया। स्थानीय लोगों में इसे लेकर भारी नाराजगी है।
नो-एंट्री में घुसी बस, शहर के बीच बना अफरा-तफरी का माहौल
जानकारी के मुताबिक रात करीब 8 बजे यात्रियों से भरी एक बस झांसी तिराहा क्षेत्र से शहर में दाखिल हुई। बस गुरुद्वारा चौराहा, माधव चौक और कमलागंज होते हुए ग्वालियर बायपास की तरफ पहुंची।दरअसल, आगे बैरिकेडिंग होने के कारण बस को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। इसके बाद ड्राइवर ने बीच सड़क से ही बस बैक करना शुरू कर दिया। इस दौरान कमलागंज क्षेत्र में लंबा जाम लग गया और लोग परेशान होते रहे।
हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े ट्रैफिक अव्यवस्था के बावजूद कोई भी पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।

शहर में भारी वाहनों की एंट्री पर आखिर रोक क्यों नहीं?
शिवपुरी में लंबे समय से नो-एंट्री जोन में भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं, जबकि ट्रक, कंटेनर और ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना रोक-टोक शहर में घुस रहे हैं।

कोर्ट रोड पर हाथ ठेलों की अव्यवस्था, झांसी तिराहे पर सरिया कारोबारियों का कब्जा और कई चौराहों पर ट्रांसपोर्ट संचालन की वजह से आए दिन जाम की स्थिति बनती हैयही वजह है कि अब लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यातायात व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है?
पहले भी जा चुकी हैं कई जानें
शिवपुरी में भारी वाहनों की वजह से हुए हादसों की सूची लंबी है। करीब एक दशक पहले कमलागंज पुल पर नो-एंट्री में घुसे एक भारी वाहन ने व्यापारी के बेटे को कुचल दिया था। उस हादसे में युवक की मौके पर मौत हो गई थी।
उस समय तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आरपी सिंह ने सख्ती दिखाते हुए शहर में भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लगाई थी। बायपास मार्गों पर बड़े लोहे के एंगल लगाए गए थे ताकि ट्रक शहर में प्रवेश न कर सकें।लेकिन अब हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौटते दिखाई दे रहे हैं।
स्कूली छात्रा से लेकर राहगीरों तक, कई हादसे छोड़ गए दर्द
गुरुद्वारा चौराहे पर एक भारी वाहन की चपेट में आकर स्कूली छात्रा गंभीर रूप से घायल हो चुकी है। वहीं एसपी बंगले के पास स्कूल से लौट रही छात्रा को कंटेनर ने कुचल दिया था। हंस बिल्डिंग क्षेत्र में भी एक असंतुलित ट्रैक्टर के नीचे दबकर मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद कुछ दिनों तक सख्ती दिखाई गई, लेकिन धीरे-धीरे सब पहले जैसा हो गया।
अब समझिए… लोगों का गुस्सा सिर्फ जाम को लेकर नहीं है, बल्कि उस डर को लेकर है जो हर दिन सड़क पर निकलते समय महसूस होता है।
चौराहों पर नहीं दिखते जवान, बायपास पर चर्चा उगाही की
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां ट्रैफिक नियंत्रण की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां पुलिसकर्मी अक्सर नदारद रहते हैं। दूसरी ओर बायपास मार्गों पर अवैध वसूली की चर्चाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शहर में इसे लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या कार्रवाई सिर्फ हादसे के बाद ही होगी?

हर हादसे के बाद कार्रवाई, फिर वही पुरानी कहानी
शिवपुरी में हर बड़े सड़क हादसे के बाद कुछ दिन तक अभियान चलता है। बैरिकेडिंग लगती है, चालान कटते हैं और बयान दिए जाते हैं। लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
यही सवाल अब शहर के लोगों के बीच सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्योंकि फिलहाल सड़कों पर दौड़ते भारी वाहन और खाली पड़े चौराहे लोगों के डर को और बढ़ा रहे हैं।