मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक बुजुर्ग ने रिश्तों से आहत होकर जिंदा रहते अपनी त्रयोदशी का आयोजन तय किया और निमंत्रण कार्ड बांटे, जिसमें उनकी पीड़ा साफ झलकती है।
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों को भावुक भी किया और सोचने पर मजबूर भी कर दिया है। करैरा क्षेत्र के एक 72 वर्षीय बुजुर्ग ने जिंदा रहते ही अपनी त्रयोदशी का आयोजन तय कर दिया है। यह आयोजन किसी परंपरा से ज्यादा उनके अकेलेपन और पारिवारिक उपेक्षा की कहानी बन गया है। बुजुर्ग ने इसके लिए बाकायदा निमंत्रण कार्ड भी बांटे हैं, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कार्ड और उसमें लिखी पंक्तियां उनके भीतर के दर्द को साफ दिखाती हैं।
रिश्तों की अनदेखी से टूटा भरोसा
शिवपुरी के ग्राम हाजीनगर निवासी कल्याण सिंह पाल अपने दो बेटों के साथ पारिवारिक विवाद के कारण अलग रह रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय से रिश्तों में दूरी बनी हुई थी। कई बार पंचायत स्तर पर समझौते की कोशिश भी हुई, लेकिन हालात नहीं बदले। इसी अनदेखी और अकेलेपन ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। गांव में यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है।
कार्ड में छिपा दर्द और संदेश
बुजुर्ग ने जो निमंत्रण कार्ड छपवाया है, उसमें लिखी पंक्तियां उनके दर्द को साफ बयान करती हैं। “मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था…' जैसी पंक्तियां सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। कार्ड पर उन्होंने खुद को आयोजक बताया है और 'जिंदा भंडारी' जैसा शब्द लिखकर लोगों को चौंका दिया है। यह कार्ड अब सिर्फ निमंत्रण नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संदेश बन गया है।
जिंदा रहते त्रयोदशी का फैसला
कल्याण सिंह पाल ने साफ कहा कि उनके अनुसार अब परिवार में उनका कोई नहीं बचा। इसी वजह से उन्होंने जिंदा रहते ही अपनी त्रयोदशी करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि मरने के बाद शायद कोई रस्म निभाए या नहीं, इसलिए वह पहले ही इसे पूरा कर लेना चाहते हैं। गांव में इस आयोजन की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
समाज के लिए उठता सवाल
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह समाज में बुजुर्गों की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। रिश्तों में बढ़ती दूरी और पारिवारिक टूटन ने कई जगह ऐसे हालात पैदा किए हैं, जहां बुजुर्ग खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। यह मामला अब सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग इसे चेतावनी और संदेश दोनों के रूप में देख रहे हैं।