शिवपुरी में 28 दिव्यांगजनों को जापानी तकनीक आधारित ई-मोटराइज्ड स्कूटी वितरित की गई। 50 लाख की लागत से 31 वाहन उपलब्ध कराए गए, जिससे दिव्यांगों को बड़ी राहत मिली है।
शिवपुरी जिले में दिव्यांगजनों के लिए एक बड़ी राहत की पहल सामने आई है। गुरुवार को मंगलम परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 28 दिव्यांगजनों को जापानी तकनीक से बनी ई-मोटराइज्ड स्कूटी वितरित की गई। यह वितरण आध्यात्मिक संत रघुवीर सिंह गौर और समाजसेवी रेणु सांखला के हाथों किया गया। कार्यक्रम में दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस योजना के तहत जिले में 31 वाहन उपलब्ध कराए हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 50 लाख रुपये बताई गई है।
जापानी तकनीक वाली ई-स्कूटी की खासियत
इस ई-स्कूटी को आईआईटी मद्रास द्वारा जापानी तकनीक के आधार पर डिजाइन किया गया है। यह वाहन दिव्यांगजनों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है यह स्कूटी एक बार चार्ज होने पर लगभग 40 किलोमीटर तक चल सकती है। इसे घर के अंदर और बाहर दोनों परिस्थितियों में आसानी से उपयोग किया जा सकता है, जिससे दिव्यांगजनों की गतिशीलता बढ़ेगी।

दिव्यांगजनों के लिए बड़ी राहत की पहल
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना है। इससे उन्हें रोजमर्रा की आवाजाही में काफी सुविधा मिलेगी। सक्षम संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि संगठन देशभर में दिव्यांगजनों के लिए निरंतर कार्य कर रहा है, इस वर्ष अकेले 573 ई-वाहनों का वितरण किया गया है, जिनमें मध्यप्रदेश के 263 लाभार्थी शामिल हैं।
सामाजिक संगठनों और प्रशासन की संयुक्त पहल
कार्यक्रम में उपस्थित दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने कहा कि आगामी चरण में शिवपुरी के करीब 50 और दिव्यांगजनों को इस योजना से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। मंगलम संस्था के अध्यक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने इसे सामाजिक सेवा और सहयोग का उदाहरण बताया। वहीं सक्षम संगठन के पदाधिकारियों ने इसे दिव्यांग सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

योजना से बढ़ेगा आत्मनिर्भरता का स्तर
इस पहल से दिव्यांगजनों को केवल परिवहन सुविधा ही नहीं मिल रही, बल्कि यह उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी बदलाव का माध्यम बन सकती है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की योजनाएं दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं और उनकी स्वतंत्रता को बढ़ावा देती हैं।
