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स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मीडिया ने सबसे अधिक भ्रामक रूप में प्रस्तुत किया - प्रखर श्रीवास्तव

भोपाल में आयोजित परिचर्चा में प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद RSS को मीडिया ने सबसे अधिक भ्रामक तरीके से पेश किया। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ पत्रकार सम्मानित हुए।


स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मीडिया ने सबसे अधिक भ्रामक रूप में प्रस्तुत किया - प्रखर श्रीवास्तव

भोपाल में आयोजित एक विशेष परिचर्चा के दौरान लेखक और वक्ता प्रखर श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) और मीडिया की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद यदि किसी संगठन को मीडिया में सबसे अधिक भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया, तो वह संघ था।

विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में “संघ के 100 वर्षों की यात्रा एवं मीडिया” विषय पर चर्चा हुई। साथ ही “देवर्षि नारद सार्थक जीवन पत्रकारिता सम्मान” और “देवर्षि नारद उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान” भी प्रदान किए गए।

गांधी हत्या और मीडिया ट्रायल का किया जिक्र

मुख्य वक्ता प्रखर श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि गांधी हत्या के बाद संघ को लेकर जिस तरह का माहौल बनाया गया, उसे समझने के लिए उस दौर के राजनीतिक और मीडिया दृष्टिकोण को देखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पत्रों और सरकारी दस्तावेजों को पढ़ने से उस समय की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है , उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास के कई पहलुओं को चुनिंदा तरीके से सामने रखा गया, जबकि कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया।

कश्मीर और सरदार पटेल का भी किया उल्लेख

प्रखर श्रीवास्तव ने जम्मू-कश्मीर पर कबायली हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय संघ स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान में फंसी हिंदू और सिख महिलाओं को बचाने के लिए संघ प्रमुख गुरुजी गोलवलकर से सहयोग मांगा गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर यह बताया जाता है कि संघ पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन यह कम चर्चा में आता है कि उसी समय कम्युनिस्ट पार्टी पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। यही सवाल अब उठ रहा है कि इतिहास के किन पहलुओं को प्रमुखता मिली और किन्हें पीछे छोड़ दिया गया।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी हुई चर्चा

कार्यक्रम में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका पर भी चर्चा हुई। प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि ऑर्गेनाइजर के पूर्व संपादक के.आर. मलकानी के लेखों को पढ़कर उस दौर की वैचारिक बहस को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि नेहरू-लियाकत पैक्ट और उससे जुड़े विमर्शों ने भारत में फ्रीडम ऑफ स्पीच की बहस को नई दिशा दी थी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि आज के समय में भी सच बोलने वालों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

पत्रकारिता सम्मान समारोह में कई वरिष्ठ हस्तियां सम्मानित

कार्यक्रम में “देवर्षि नारद सार्थक जीवन पत्रकारिता सम्मान 2025” महेश श्रीवास्तव और वर्ष 2026 का सम्मान कैलाश नारायण गौड़ को दिया गया। वहीं “देवर्षि नारद उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान” से प्रमोद शर्मा, योगीराज योगेश, भावना अपराजिता शुक्ला, स्मिता, अनुज मैना और गोविंद सक्सेना सहित कई पत्रकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता, समाज और राष्ट्रचिंतन से जुड़े कई वरिष्ठ लोग मौजूद रहे।

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