मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व नेता राकेश सिंह यादव भाजपा में शामिल हो गए। प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें सदस्यता दिलाई और पार्टी ने प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी सौंपी।
मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस छोड़ने के कुछ दिन बाद भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे की मौजूदगी में उन्होंने सदस्यता ग्रहण की।
भाजपा ने केवल सदस्यता तक ही उन्हें सीमित नहीं रखा। पार्टी ने तत्काल उन्हें प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंप दी। इसे संगठन की ओर से उनके राजनीतिक अनुभव पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस से नाराजगी के बाद बदला राजनीतिक ठिकाना
राकेश सिंह यादव ने कुछ दिन पहले कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की बात सुनने की बजाय कुछ नेताओं के इर्द-गिर्द ही फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन के कामकाज पर भी सवाल उठाए थे।
भाजपा ने तुरंत दी बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा में शामिल होने के साथ ही राकेश सिंह यादव को प्रदेश प्रवक्ता का दायित्व सौंप दिया गया। आमतौर पर नई सदस्यता लेने वाले नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने में समय लगता है, लेकिन यादव को तत्काल प्रवक्ता बनाए जाने को भाजपा का राजनीतिक संदेश माना जा रहा है कि पार्टी विपक्ष से आने वाले अनुभवी नेताओं को अहम भूमिका देने के पक्ष में है।
इंदौर और मालवा की राजनीति पर नजर
राकेश सिंह यादव लंबे समय से इंदौर और मालवा क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। कांग्रेस में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालने के कारण उनका स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच नेटवर्क भी मजबूत माना जाता है। ऐसे में भाजपा को उम्मीद होगी कि उनका अनुभव आगामी राजनीतिक रणनीति में काम आएगा, जबकि कांग्रेस के लिए यह संगठनात्मक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।
बयानों से पहले ही बढ़ा चुके थे सियासी तापमान
भाजपा में शामिल होने से पहले राकेश सिंह यादव लगातार कांग्रेस नेतृत्व पर हमलावर थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हो गया है और कई फैसले कार्यकर्ताओं की राय के बिना लिए जा रहे हैं। उनके इन बयानों के बाद कांग्रेस ने अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए कार्रवाई भी की थी।