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sonam raghuvanshi Bail Twist in raja Murder Case

हत्या का आरोप, फिर भी सोनम रघुवंशी को कैसे मिली बेल? एक नंबर की गलती ने बदल दिया पूरा खेल

तीन बार खारिज जमानत, चौथी बार कैसे मिल गई राहत? राजा रघुवंशी मर्डर केस में पुलिस की एक गलती ने केस की दिशा बदल दी। जानिए सोनम रघुवंशी बेल पर कोर्ट ने क्या कहा।


हत्या का आरोप फिर भी सोनम रघुवंशी को कैसे मिली बेल एक नंबर की गलती ने बदल दिया पूरा खेल

How Sonam Raghuvanshi Get Bail |

मेघालय में सामने आए हनीमून कांड में राजा रघुवंशी मर्डर केस ने अचानक नया मोड़ ले लिया है। हत्या के गंभीर आरोप झेल रही सोनम रघुवंशी को कोर्ट से जमानत मिल गई है। इसकी जो वजह सामने आई है वह बहुत चौंकाने वाली है। इससे पहले तीन बार जमानत याचिका खारिज हुई थी।

तीन बार जमानत खारिज होने के बाद आखिरकार चौथी बार में उसी अदालत राहत दे देती है। इसके बाद सवाल उठता है कि क्या सबूत कमजोर पड़े या कहानी में कोई और ट्विस्ट आया? जांच में सामने आया कि पूरा मामला एक तकनीकी चूक पर अटक गया। पुलिस की एक लिखने की गलती ने आरोपी को राहत दिला दी।

गलत धारा ने केस की नींव हिला दी

मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कोर्ट ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। पता चला कि पुलिस ने हत्या जैसे गंभीर आरोप में गलत धारा दर्ज कर दी। जहां हत्या के लिए सख्त प्रावधान लागू होना चाहिए था। वहां, ऐसी धारा लिखी गई जिसका इस अपराध से कोई सीधा संबंध नहीं था। यही गलती केस की सबसे कमजोर कड़ी बन गई। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि धाराओं की गलत एंट्री सिर्फ तकनीकी चूक नहीं, बल्कि केस की वैधता पर सवाल खड़ा करती है।

कोर्ट ने कहा ये सिर्फ टाइपो नहीं सिस्टम फेलियर

अदालत ने साफ किया कि गलती सिर्फ एक दस्तावेज तक सीमित नहीं थी। FIR, गिरफ्तारी मेमो और केस डायरी हर जगह वही त्रुटि दोहराई गई। जज ने टिप्पणी की कि इसे 'टाइपिंग मिस्टेक' कहकर टाला नहीं जा सकता। यह जांच प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही का संकेत है। कानूनी प्रक्रिया में सटीकता जरूरी होती है। जब वही गायब हो, तो आरोपी को राहत मिलना तय हो जाता है।

आरोपी के अधिकारों का मुद्दा बना गेम चेंजर

कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को सही जानकारी देना अनिवार्य है। यहां सवाल उठ रहा है कि क्या सोनम को बताया गया था कि उसे हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है? रिकॉर्ड्स में इसका स्पष्ट जवाब नहीं मिला। यही बिंदु बचाव पक्ष के लिए मजबूत आधार बना। कानून में प्रक्रिया का पालन न होना सीधे आरोपी के पक्ष में जाता है।

वकील की गैरमौजूदगी ने बढ़ाया विवाद

पहली पेशी के दौरान सोनम के पास वकील नहीं था। इस बात ने भी केस की दिशा प्रभावित की। अगर शुरुआती चरण में कानूनी प्रतिनिधित्व होता, तो यह गलती पहले ही पकड़ में आ सकती थी। अब यही चूक पूरे केस पर भारी पड़ती दिख रही है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सिस्टम ने आरोपी को शुरुआती स्तर पर निष्पक्ष मौका दिया था।

हनीमून से हत्या तक की पूरी कहानी

इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी मई 2025 में हुई। कुछ ही दिनों बाद दंपति मेघालय हनीमून के लिए गए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यहीं से साजिश शुरू हुई। आरोप है कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। कुछ दिनों बाद राजा का शव खाई में मिला। पुलिस ने मामले को साजिश और सुपारी किलिंग से जोड़कर जांच आगे बढ़ाई।

जमानत मिली, लेकिन राहत पूरी नहीं

अदालत ने जमानत देते समय सख्त शर्तें लगाई हैं। आरोपी को हर सुनवाई में पेश होना होगा और गवाहों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं होगी। शहर छोड़ने पर भी रोक है और आर्थिक जमानत की शर्तें लागू की गई हैं।

कानूनी तौर पर यह साफ है कि जमानत का मतलब क्लीन चिट नहीं। लेकिन इस केस ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या जांच एजेंसियों की छोटी गलतियां बड़े अपराधों को कमजोर कर सकती हैं?

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