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Raisen Agriculture Festival

रायसेन कृषि महोत्सव में बोले शिवराज: बोले- किसान की जिंदगी नहीं बदली तो कुर्सी का क्या फायदा

रायसेन में राष्ट्रीय कृषि महोत्सव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीएम मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए। किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीक और रोडमैप को लेकर बड़ी घोषणाएं की गईं।


 रायसेन कृषि महोत्सव में बोले शिवराज बोले- किसान की जिंदगी नहीं बदली तो कुर्सी का क्या फायदा

रायसेन: रायसेन के दशहरा मैदान में शनिवार से तीन दिवसीय राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस आयोजन में देश की शीर्ष राजनीतिक और कृषि नेतृत्व की मौजूदगी देखने को मिली। कार्यक्रम में राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान दोपहर करीब 12:30 बजे पहुंचे। 

किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

मंच से संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के चार जिले—रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास—के लिए वैज्ञानिकों द्वारा विशेष कृषि रोडमैप तैयार किया गया है, जिसे कल दोपहर 1 बजे घोषित किया जाएगा। इस रोडमैप के तहत यह बताया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन सी फसल बेहतर होगी और किस प्रकार की मिट्टी के लिए कौन से पौधे उपयुक्त हैं। 

“एक एकड़ में दो लाख की आय” का लक्ष्य

शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की आय बढ़ाने को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बीज से लेकर बाजार तक की व्यवस्था और मिट्टी परीक्षण के माध्यम से किसान एक एकड़ में दो लाख रुपये तक की आय कमा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेत की मिट्टी के अनुसार खाद और उर्वरक का सही उपयोग जरूरी है, जिसे आधुनिक मशीनें तुरंत बता सकती हैं। 

“कुर्सी पर बोझ बनकर बैठने का क्या फायदा”

अपने भाषण में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसानों का जीवन बेहतर नहीं हो पाता तो मंत्री पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तविक लक्ष्य किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना है।

आधुनिक कृषि तकनीक पर जोर

आयोजन में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां कृषि यंत्रीकरण, ड्रोन तकनीक, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, बागवानी और पशुपालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, नाबार्ड और नेफेड जैसे संस्थान भी भाग ले रहे हैं।

पशुपालन और नई तकनीक बनी आकर्षण

महोत्सव में गिर, साहीवाल और थारपारकर नस्ल की गायों के साथ बकरी और कड़कनाथ मुर्गी पालन मॉडल भी प्रदर्शित किए गए हैं। मत्स्य पालन के क्षेत्र में बायोफ्लॉक और आरएएस जैसी आधुनिक तकनीकों को भी दिखाया जा रहा है। किसानों को तीन दिन तक प्रशिक्षण, विशेषज्ञों से संवाद और स्टार्टअप प्रस्तुतियों का लाभ मिलेगा।

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