रायपुर में खामेनेई की मौत पर शिया समुदाय ने शोक सभा की। ट्रंप और नेतन्याहू के पोस्टर लगाकर विरोध जताया गया, मोमिनपारा और पंडरी में लोग सड़कों पर उतरे।
रायपुर। ईरान में हुए हमले और वहां के सुप्रीम लीडर की मौत की खबर का असर हजारों किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ में भी दिखाई दिया। राजधानी रायपुर की सड़कों पर गुस्सा भी था और गम भी। कहीं पोस्टर चिपकाए गए, कहीं शोक सभा हुई, तो कहीं लोगों ने सड़क पर विरोध जताया। माहौल भावनात्मक था, और कई जगह नारों की आवाज देर तक सुनाई देती रही।
अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद शहर के शिया समुदाय में आक्रोश देखा गया।
मोमिनपारा में सड़क पर विरोध
रायपुर के मोमिनपारा इलाके में रविवार को अलग ही दृश्य था। सड़क किनारे और दीवारों पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में 'डाउन टू अमेरिका' और 'डाउन टू इजरायल' लिखा गया था। कुछ पोस्टरों पर नीली स्याही भी फेंकी गई थी। राहगीर जब वहां से गुजरे तो कई लोगों ने इन पोस्टरों को पैरों से रौंदा, कुछ ने मोबाइल से वीडियो भी बनाए।
स्थानीय लोगों का कहना था कि यह विरोध प्रतीकात्मक है, लेकिन भावनाएं सच्ची हैं। एक युवक ने कहा कि 'हम खामेनेई साहब के लिए दुखी हैं, और जो हुआ उसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं'।
इमामबाड़ा में शोक सभा, मजलिस का आयोजन
शहर के शिया बहुल इलाकों मोमिनपारा और पंडरी में इमामबाड़ा और अन्य धार्मिक स्थलों पर लोग इकट्ठा हुए। पंडरी स्थित इमाम बारगाह में मजलिस कर शोक सभा आयोजित की गई। खोजा जमात और ईरानी मूल के समुदाय के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। माहौल शांत था, लेकिन चेहरों पर गम साफ दिख रहा था। धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ खामेनेई को श्रद्धांजलि दी गई। एक बुजुर्ग ने कहा कि हमारे लिए यह सिर्फ एक राजनीतिक नेता की मौत नहीं है, यह हमारे मजहबी रहनुमा का जाना है।
हमले में क्या हुआ था?
बताया जा रहा है कि तेहरान में हुए हमले में ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस दौरान Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के मुख्यालय पर भी हमला हुआ। सूत्रों के मुताबिक, हमले के समय खामेनेई अपने कार्यालय में मौजूद थे। ईरानी स्टेट मीडिया ने दावा किया कि वह अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे, तभी यह हमला हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों में परिसर को भारी नुकसान पहुंचा दिखाया गया है.
हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। लेकिन शिया समुदाय के भीतर शोक और विरोध का स्वर एक जैसा है।
शहर में सुरक्षा पर नजर
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी स्थिति पर नजर रखी। फिलहाल शहर में माहौल शांत बताया जा रहा है, लेकिन संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है। रायपुर में यह विरोध इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर स्थानीय स्तर तक महसूस किया जाता है। लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं, और जब ऐसे बड़े घटनाक्रम होते हैं तो उनका असर सड़कों तक दिख ही जाता है।