ग्वालियर में आयोजित साहित्यिक समारोह में सीताराम बघेल के महाकाव्य ‘पंचतंत्र’ का विमोचन हुआ। उन्हें ‘गीत ऋषि सम्मान’ से अलंकृत किया गया।
ग्वालियर में धरातल संस्था द्वारा आयोजित गरिमामयी साहित्यिक समारोह में मुरैना के साहित्यकार सीताराम बघेल के महाकाव्य ‘पंचतंत्र’ का भव्य विमोचन किया गया। इस अवसर पर साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे। समारोह में सीताराम बघेल को उनकी दीर्घ साहित्य साधना और महाकाव्य रचना के लिए ‘गीत ऋषि सम्मान’ से अलंकृत किया गया।
यह आयोजन धरातल संस्था के संरक्षक बालकुमार तिवारी ‘कुमारेश’ के 81वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और मातृशक्ति सम्मान का विशेष संगम देखने को मिला।
साहित्यकारों की मौजूदगी में हुआ भव्य आयोजन

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रज्ञा पुरुष एवं तुलसी अकादमी के पूर्व सचिव भगवान स्वरूप चैतन्य ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार सुरेश सम्राट तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में माधव महाविद्यालय की वाइस प्रिंसिपल सरिता दीक्षित उपस्थित रहीं।समारोह के दौरान साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रचनाकारों को सम्मानित भी किया गया।
‘गीत ऋषि सम्मान’ से अलंकृत हुए सीताराम बघेल

महाकाव्य ‘पंचतंत्र’ और साहित्यिक योगदान के लिए सीताराम बघेल को ‘गीत ऋषि’ की उपाधि प्रदान की गई। वहीं ‘सुधीर नगर गौरव सम्मान’ ग़ज़लकार रमेश वियोगी कुशवाहा एवं कवि-पत्रकार राजेश अवस्थी ‘लावा’ को दिया गया।मातृदिवस के उपलक्ष्य में पुष्पा सिसोदिया, आशा चैतन्य, सुनीति बैस, दीप ज्योति गुप्ता और तृप्ति शर्मा को ‘नारी शक्ति सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
महाकाव्य को बताया तात्विक और सारगर्भित
महाकाव्य की समीक्षा करते हुए डॉ. सरिता दीक्षित ने ‘पंचतंत्र’ को सारगर्भित और तात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कृति बताया। मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश सम्राट और अध्यक्ष डॉ. भगवान स्वरूप चैतन्य ने अपने संबोधन में कहा कि सीताराम बघेल एक प्रज्ञावान साधक हैं और उन्हें महाकवि कहना उचित है।संयोजक देवेंद्र राही ने सीताराम बघेल के कृतित्व और व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन राजेश अवस्थी ‘लावा’ ने किया।
‘पंचतंत्र’ भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर-डॉ. कृष्णचन्द्र 'कलानिधि'

स्वर्ण पदक और हीरक पदक प्राप्त साहित्यकार डॉ. कृष्णचन्द्र 'कलानिधि' ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पंचतंत्र विश्व साहित्य में भारतीय साहित्य की महनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि विष्णु शर्मा द्वारा रचित पंचतंत्र की कहानियां आज भी विश्वभर में पढ़ी जाती हैं और अनेक भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं।उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दी भाषा की देवनागरी लिपि में पंचतंत्र का काव्यांतरण पहली बार इस रूप में प्रस्तुत हुआ है। सीताराम बघेल ने इसे सरल, सहज और सुगम शैली में प्रस्तुत कर साहित्य जगत को नई दिशा दी है।
साहित्यप्रेमियों की रही उल्लेखनीय उपस्थिति
समारोह में चेतराम भदौरिया ‘श्रमिक’, रामअवध विश्वकर्मा, घनश्याम भारती, रमेश त्रिपाठी, आलोक शर्मा, सुरेश वशिष्ठ, प्रवीण कम्ठान, धीरेन्द्र ‘धीर’, डॉ. जयमाला मिश्रा, ज्योति दिनकर, रेशमा बानो और तमन्ना सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।कार्यक्रम के अंत में संरक्षक बालकुमार तिवारी ‘कुमारेश’ ने सभी अतिथियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इसके बाद सहभोज का आयोजन भी किया गया।