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Heatwave Hits Orange Farmers in MP

तेज गर्मी ने बर्बाद की संतरे की फसल: पांढुर्णा-मारुड के किसान संकट में, कई गांवों में पानी के लिए भटक रहे लोग

पांढुर्णा और मारुड में तेज गर्मी से संतरे की फसल बर्बाद हो रही है। किसान आर्थिक राहत और तकनीकी मदद की मांग कर रहे हैं, वहीं भैंसदेही में पेयजल संकट गहरा गया है।


तेज गर्मी ने बर्बाद की संतरे की फसल पांढुर्णा-मारुड के किसान संकट में कई गांवों में पानी के लिए भटक रहे लोग 

संतरांचल के प्रमुख ग्राम मारुड में इस वर्ष संतरा उत्पादक किसानों पर मौसम की मार भारी पड़ रही है। क्षेत्र की लगभग 80 प्रतिशत कृषि भूमि में संतरे के बगीचे होने के कारण मारुड को जिले का 'कैलिफोर्निया' भी कहा जाता है, लेकिन इस बार बढ़ते तापमान ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

मारुड में संतरे की फसल पर गर्मी की मार 

आंबिया बहार की फसल इस वर्ष अच्छी बताई जा रही थी और किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी। गत वर्ष जहां उत्पादन कम होने के बावजूद संतरे के अच्छे दाम मिले थे, वहीं इस बार अच्छी पैदावार की संभावना ने किसानों में उत्साह बढ़ाया था। लेकिन अचानक तापमान में वृद्धि और तेज धूप के कारण बेर के आकार के संतरे काले पड़कर डंठल से गिरने लगे हैं। स्थिति यह है कि कई बगीचों में 50 प्रतिशत से अधिक फल झड़ चुके हैं, जिससे किसानों में भारी निराशा देखी जा रही है।

मार्गदर्शन के अभाव में किसान परेशान

किसानों का आरोप है कि उन्हें न तो कृषि विभाग से कोई ठोस मार्गदर्शन मिल रहा है और न ही फलोद्यान विभाग से पर्याप्त सहयोग प्राप्त हो रहा है। मजबूरी में किसान अपने अनुभव और पारंपरिक तरीकों के आधार पर खेती कर रहे हैं। फलोद्यान विभाग द्वारा केवल 15 वर्ष से अधिक पुराने संतरा पेड़ों के जीर्णोद्धार के लिए सीमित अनुदान दिया जाता है, जबकि अन्य किसी प्रकार की विशेष योजना उपलब्ध नहीं है।

किसानों की पीड़ा

मारुड के किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद गावंडे ने बताया कि उन्होंने आंबिया बहार की फसल पर तीन बार स्प्रे और नियमित सिंचाई की, इसके बावजूद तेज धूप के कारण फल गिर रहे हैं, जिससे भारी नुकसान हो रहा है। वहीं पैलेपार के किसान मुरलीधर बरडे ने कहा कि 1996 में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने संतरे के सूखे पेड़ों के लिए मुआवजा दिलाने की पहल की थी, लेकिन अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने किसानों की खैर-खबर नहीं ली।

लगातार गिरते फलों ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।किसानों का कहना है कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में संतरा उत्पादकों को पौधारोपण से लेकर फसल बीमा तक कई प्रकार की सहायता दी जाती है, जबकि मध्यप्रदेश में ऐसी सुविधाओं का अभाव है। इससे यहां के किसान खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

लगातार कई वर्षों से फल गलन और उचित दाम न मिलने की समस्या से जूझ रहे संतरा उत्पादक किसान अब सरकार से आर्थिक राहत की मांग कर रहे हैं। साथ ही संतरे की प्रोसेसिंग, भंडारण और नई तकनीकों को बढ़ावा देने की भी आवश्यकता जताई जा रही है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

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