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Noida Violence Pakistan X Handler Conspiracy

नोएडा हिंसा में बड़ा खुलासा, पाकिस्तानी X हैंडलर से भड़काए गए श्रमिक

नोएडा हिंसा में बड़ा खुलासा, पाकिस्तानी X हैंडलर से साजिश का आरोप। श्रमिकों को सोशल मीडिया से भड़काया गया। अब तक 13 FIR और कई गिरफ्तारियां।


नोएडा हिंसा में बड़ा खुलासा पाकिस्तानी x हैंडलर से भड़काए गए श्रमिक

नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में हाल ही में हुए हिंसक श्रमिक प्रदर्शन को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला है कि इस घटना के पीछे पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडल की भूमिका हो सकती है। पुलिस ने इस मामले में दो संदिग्ध X (पूर्व ट्विटर) हैंडल के खिलाफ केस दर्ज किया है।

13 FIR दर्ज, 62 से अधिक गिरफ्तार

पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के अनुसार, अब तक इस मामले में 13 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 62 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, व्यापक कार्रवाई के दौरान करीब 600 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। 

जांच एजेंसियों के अनुसार, श्रमिकों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भड़काया गया। खासतौर पर X और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बनाए गए ग्रुप्स में भड़काऊ संदेश फैलाए गए। इसके अलावा व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए भी कई राज्यों से श्रमिकों को उकसाने की कोशिश की गई।

दक्षिण भारत से जुड़े डिजिटल लिंक

एसटीएफ जांच में तेलंगाना और कर्नाटक से जुड़े कुछ डिजिटल सबूत सामने आए हैं। इन राज्यों से संचालित ग्रुप्स के जरिए संदेश फैलाए गए, जिससे प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। जांच एजेंसियां 500 से अधिक वीडियो की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस ने ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ संगठन के प्रमुख रूपेश राय समेत 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह संगठन फैक्ट्री क्षेत्रों में जाकर श्रमिकों को उकसाने का काम कर रहा था। इससे पहले मानेसर में भी इसी तरह की गतिविधियों के आरोप लगे थे।

प्रशासन अलर्ट, शांति बहाल करने की कोशिश

घटना के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जिलाधिकारी मेधा रूपम समेत अन्य अधिकारी औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। श्रमिकों से संवाद स्थापित कर स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि लगभग 70 प्रतिशत उद्योगों में काम दोबारा शुरू हो चुका है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर मामला

प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के बाद इस घटना को केवल श्रमिक विवाद नहीं, बल्कि संभावित बाहरी साजिश के रूप में भी देखा जा रहा है। एजेंसियां इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि क्या देश की आंतरिक शांति को प्रभावित करने की कोशिश की गई। 

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