नौरादेही टाइगर रिजर्व की घायल बाघिन को जबलपुर में इलाज के लिए लाया गया है। CDV जांच निगेटिव आई है, लेकिन उसकी स्थिति अभी भी गंभीर है।
जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व में हाल ही में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से बाघों की मौत के बाद वन विभाग पूरी तरह सतर्क है। इसी बीच नौरादेही (वीरांगना दुर्गावती) टाइगर रिजर्व में घायल मिली एक कम उम्र की बाघिन को उपचार के लिए शुक्रवार रात जबलपुर स्थित सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक लाया गया।राहत की बात यह है कि बाघिन के सैंपलों की कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) जांच निगेटिव आई है। हालांकि, उसकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
15 से 18 महीने की है बाघिन
वन विभाग के अनुसार, बाघिन की उम्र करीब 15 से 18 महीने आंकी गई है। जांच में उसके पिछले पैरों में सूजन, शरीर के अंदरूनी हिस्सों में चोट और लंबे समय तक भूखा रहने के संकेत मिले हैं।चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए ड्रिप लगाकर उपचार शुरू किया है और लगातार स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है।
वन कर्मचारी पर हमले के बाद शुरू हुई तलाश
वन विभाग के मुताबिक, 5 जुलाई 2026 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के मोहली परिक्षेत्र में एक श्रमिक पर बाघ ने हमला कर उसे घायल कर दिया था।घायल श्रमिक और मौके पर मौजूद महिला वनरक्षक ने बताया था कि हमलावर बाघ के पंजे छोटे थे, जिससे उसके कम उम्र का होने का अनुमान लगाया गया।इसके बाद 7 जुलाई को चलाए गए सर्च अभियान के दौरान एक कम उम्र की घायल बाघिन दिखाई दी। वन विभाग को आशंका है कि श्रमिक पर हमला करने वाली बाघिन यही हो सकती है।
वन विभाग की लगातार निगरानी
कान्हा में हाल ही में सामने आए CDV संक्रमण के मामलों के बाद वन विभाग इस बाघिन की स्थिति पर विशेष नजर रखे हुए है। फिलहाल वायरस की जांच निगेटिव आने से राहत मिली है, लेकिन उसकी गंभीर शारीरिक स्थिति को देखते हुए उपचार और निगरानी जारी रहेगी।