मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी में देरी को लेकर कांग्रेस ने राज्यभर में प्रदर्शन किया। जीतू पटवारी ने सरकार पर घोटाले का आरोप लगाया। कई जिलों में किसानों के साथ धरना और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी प्रक्रिया में देरी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रदेश के कई जिलों में कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाए कि किसानों को समय पर समर्थन मूल्य का लाभ नहीं दिया गया। खंडवा, रतलाम और भोपाल समेत कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। खंडवा में प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश किया और जोरदार नारेबाजी की। यहां बड़ी संख्या में किसान भी शामिल हुए। रतलाम में कृषि उपज मंडी परिसर में कांग्रेस ने धरना प्रदर्शन किया, जिसमें किसानों की भी भागीदारी देखने को मिली। भोपाल में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध दर्ज कराया।
इसी बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने रणनीतिक तरीके से गेहूं खरीदी में देरी की है और बारदाने की कमी का बहाना बनाकर किसानों को उचित मूल्य से वंचित रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 10 लाख क्विंटल गेहूं ओपन मार्केट में बिक चुका है और करीब 25 प्रतिशत गेहूं 1600 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचा गया है। पटवारी ने इसे किसानों के साथ धोखा करार दिया।
जीतू पटवारी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा घोषित 2700 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं, 3100 रुपये धान और 6000 रुपये सोयाबीन के वादे पूरे नहीं किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में किसान कल्याण के दावों के बावजूद किसानों का शोषण हो रहा है। सरकारी पक्ष की ओर से कहा गया है कि चार संभागों में आज से गेहूं खरीदी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार प्रक्रिया को सुचारू बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इस पर निगरानी रखी जा रही है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा और किसान मुद्दों को लेकर आंदोलन और तेज किया जाएगा।