मध्य प्रदेश में आदिवासी स्कूलों के स्कूल शिक्षा विभाग में विलय के प्रस्ताव पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने आपत्ति जताई है। मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जनजातीय कार्य विभाग के अधीन ही स्कूल संचालित रखने की सल
भोपाल। मध्यप्रदेश में आदिवासी छात्रों के लिए संचालित स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग में विलय करने की प्रस्तावित प्रक्रिया पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने आपत्ति उठाई है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है। बता दें कि मध्य प्रदेश के 20 जिलों के 89 आदिवासी विकासखण्डों की शालाओं को स्कूल शिक्षा में मर्ज करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि राज्यपाल की आपत्ति के बाद यह प्रस्ताव रूक सकता है।
राज्यपाल ने लिखे पत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सलाह दी है कि जनजातीय क्षेत्रों में संचालित स्कूलों को जनजातीय कार्य विभाग के अधीन ही रखा जाए। इन्हें स्कूल शिक्षा विभाग में विलय न किया जाए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आदिवासी समुदाय के बच्चों की शिक्षा उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में इन स्कूलों का संचालन जनजातीय कार्य विभाग के माध्यम से ही अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि विभागीय ढांचे में बदलाव से आदिवासी छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
जनजातीय विभाग के अधिकारियों की माने, तो यदि सरकार राज्यपाल की सलाह पर अमल करती है, तो आदिवासी स्कूल पहले की तरह जनजातीय कार्य विभाग के अधीन ही संचालित होते रहेंगे। वहीं, यदि विलय प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, तो इस पर आवश्यक प्रशासनिक निर्णय लिए जाने की संभावना है।
आदिवासी संगठनों और विपक्ष ने भी उठाई आपत्ति
बता दें कि राज्य सरकार, प्रशासनिक सुधार और शिक्षा व्यवस्था को एकीकृत करने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य विभाग के अधीन संचालित स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग में मर्ज करने की संभावना पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव को लेकर आदिवासी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्ष की ओर से भी कई आपत्तियां सामने आई थीं। इस मामले पर राज्यपाल का पत्र आने के बाद माना जा रहा है कि सरकार इस प्रस्ताव पर दोबारा विचार कर सकती है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रदेश के 24 हजार जनजातीय स्कूलों का होना है विलय
मध्य प्रदेश के 20 जिलों के 89 आदिवासी विकासखण्डों में शिक्षा का स्तर उठाने के लिए कई विशिष्ट आवासीय और गैर-आवासीय विद्यालय संचालित किए जाते हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षा प्रणाली में एकरूपता लाने के लिए राज्य सरकार ने जनजातीय कार्य विभाग के 24,000 से अधिक स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग में विलय करने का प्रस्ताव तैयार किया है। आदिवासी क्षेत्रों के लिए प्रमुख स्कूलों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय है, जो केंद्र सरकार से प्रायोजित आवासीय विद्यालय नवोदय विद्यालय की तर्ज पर खुले हैं।
ये स्कूल 50 प्रतिशत से अधिक आदिवासी आबादी वाले ब्लॉकों में कक्षा 6 से 12 वीं तक मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं। इसी तरह माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर योजना में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को एकीकृत करके एक परिसर-एक शाला के रूप में चलाया जा रहा है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, जबलपुर और शहडोल जैसे संभागीय मुख्यालयों पर आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए सीबीएसई पाठ्यक्रम की तर्ज पर गुरुकुलम आवासीय विद्यालय खोले गए हैं।