मध्य प्रदेश में उज्जैन, ग्वालियर और अमरकंटक विकास प्राधिकरणों में बड़ी राजनीतिक नियुक्तियां। अशोक शर्मा साडा ग्वालियर के अध्यक्ष बने, कई नेताओं को नई जिम्मेदारी।
भोपाल। मध्य प्रदेश में लगातार राजनीतिक नियुक्तियों का दौर जारी है। गुरुवार से शुरू हुआ यह सिलसिला अब ग्वालियर, उज्जैन और अमरकंटक जैसे महत्वपूर्ण विकास प्राधिकरणों तक पहुंच गया है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों के आदेश जारी किए गए हैं।
ग्वालियर और उज्जैन में बड़ी नियुक्तियां
ग्वालियर के बीजेपी नेता महेंद्र सिंह यादव को अपेक्स बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उज्जैन विकास प्राधिकरण में रवीन्द्र सोलंकी को अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं मुकेश यादव और रवि वर्मा को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। UDA में सदस्य के रूप में विजय अग्रवाल, अमित श्रीवास्तव, रामचंद्र शर्मा (रामागुरु), सुशीला जाटव और दुर्गा बिलोटिया को शामिल किया गया है।
ग्वालियर विकास प्राधिकरण और SAADA में बदलाव
विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SAADA) ग्वालियर में अशोक शर्मा को अध्यक्ष बनाया गया है। हरीश मेवाफरोश को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। ग्वालियर विकास प्राधिकरण (GDA) में मधुसूदन भदौरिया को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि सुधीर गुप्ता और वेदप्रकाश शिवहरे को उपाध्यक्ष बनाया गया है।
लगातार चार दिनों से नियुक्तियों का दौर
मध्य प्रदेश में पिछले चार दिनों से विभिन्न आयोगों और निगमों में राजनीतिक नियुक्तियां जारी हैं। कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग संस्थानों में जिम्मेदारियां दी गई हैं।
23 अप्रैल की नियुक्तियां
अनुसूचित जनजाति आयोग: राम लाल रौतेल (अध्यक्ष), मंगल सिंह धुर्वे और भगत नेताम (सदस्य)
अनुसूचित जाति आयोग: कैलाश जाटव (अध्यक्ष), रामलाल मालवीय और बारेलाल अहिरवार (सदस्य)
24 अप्रैल की नियुक्तियां
पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम: केशव सिंह बघेल (अध्यक्ष)
ग्वालियर मेला प्राधिकरण: अशोक जादौन (अध्यक्ष), उदयवीर सिंह गुर्जर (उपाध्यक्ष)
25 अप्रैल की नियुक्तियां
नागरिक आपूर्ति निगम: केपी यादव (अध्यक्ष), संजीव कांकर (उपाध्यक्ष)
वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन: संजय नगायच (अध्यक्ष)
महाराणा प्रताप बोर्ड: केशव सिंह भदौरिया (अध्यक्ष)
राजनीतिक संतुलन की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन नियुक्तियों के जरिए सरकार विभिन्न क्षेत्रों और गुटों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। विकास प्राधिकरणों और निगमों में नए चेहरों को शामिल कर प्रशासनिक कामकाज को गति देने का भी लक्ष्य बताया जा रहा है।