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MP Nagar Parishad Alderman List 2026 Update

MP के नगर परिषदों में एल्डरमैन की घोषणा: चंबल-बुंदेलखंड की सूची होल्ड

मध्यप्रदेश में 25 जिलों की 123 नगर परिषदों में एल्डरमैन नियुक्ति की घोषणा। चंबल और बुंदेलखंड की सूची फिलहाल रोकी गई। जानिए पूरी अपडेट।


mp के नगर परिषदों में एल्डरमैन की घोषणा चंबल-बुंदेलखंड की सूची होल्ड

मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद रविवार को नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की नियुक्तियों की घोषणा कर दी गई। राज्य के 25 जिलों की 123 नगर परिषदों में एल्डरमैन के नाम जारी किए गए हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये नियुक्तियां मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 19(1)(ग) के तहत की गई हैं। प्रत्येक नगर परिषद में अधिकतम चार एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं, जिनका कार्यकाल संबंधित परिषद के कार्यकाल तक या आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा।

चंबल और बुंदेलखंड की सूची फिलहाल होल्ड

सरकार ने फिलहाल चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र की नगर परिषदों में एल्डरमैन की सूची जारी नहीं की है। बताया जा रहा है कि कई निकायों में नामों को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण सूची को होल्ड पर रखा गया है। पहले चरण में प्रदेश के अन्य जिलों की नगर परिषदों से शुरुआत की गई है, ताकि प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

25 जिलों की नगर परिषदों में नियुक्तियां

जारी सूची में सागर, रीवा, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, कटनी, डिंडोरी, नरसिंहपुर, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, रतलाम, मंदसौर और नीमच जिलों की नगर परिषदों में एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं।इन परिषदों में स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े अनुभवी व्यक्तियों को मनोनीत किया गया है। कई जगहों पर पुराने कार्यकर्ताओं को मौका देकर संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश भी दिखाई देती है।

एल्डरमैन की भूमिका और अधिकार

नगर परिषदों में नियुक्त एल्डरमैन परिषद की बैठकों में भाग ले सकते हैं और विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रख सकते हैं, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होता। उनका मुख्य कार्य प्रशासनिक मार्गदर्शन देना और परिषद के कामकाज को बेहतर बनाने में सहयोग करना होता है।इनका कार्यकाल परिषद के कार्यकाल के साथ समाप्त हो जाता है। सरल शब्दों में कहें तो एल्डरमैन निर्णय लेने वाले नहीं, बल्कि सलाह देने वाले सदस्य होते हैं।

निकाय चुनाव से पहले रणनीतिक कदम

राजनीतिक दृष्टि से इन नियुक्तियों को आगामी नगरीय निकाय चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सत्तारूढ़ दल ने इसे संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के तौर पर इस्तेमाल किया है।सूत्रों के अनुसार, उन अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और जिन्हें नगर प्रशासन का अनुभव है। इससे एक ओर जहां कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम करने की कोशिश की गई है, वहीं दूसरी ओर परिषदों के कामकाज पर संगठन की पकड़ मजबूत करने का प्रयास भी किया गया है।

नियुक्तियों उद्देश्य

इन नियुक्तियों के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य सामने आए हैं। पहला, लंबे समय से पद की प्रतीक्षा कर रहे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर संतुष्ट करना। दूसरा, अनुभवी लोगों के जरिए परिषदों में विकास कार्यों की निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण को बेहतर बनाना।

हर नगर परिषद में 4 एल्डरमैन का फॉर्मूला

भाजपा संगठन में कई दौर की बैठकों और मंथन के बाद यह तय किया गया कि हर नगर परिषद में अधिकतम चार एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। यह फॉर्मूला बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक समान रूप से लागू किया गया है, ताकि संगठनात्मक संतुलन बना रहे और स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय हो सके।

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