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आयुष भर्ती पर हाईकोर्ट की बड़ी रोक

आयुष भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक, 50% आरक्षण विवाद ने बढ़ाई हजारों डॉक्टरों की उम्मीद

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। 50% आरक्षण विवाद को लेकर राज्य सरकार और MPPSC से जवाब मांगा गया है।


आयुष भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक 50 आरक्षण विवाद ने बढ़ाई हजारों डॉक्टरों की उम्मीद

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाकर राज्य सरकार और एमपीपीएससी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मामला उन संविदा आयुष चिकित्सकों से जुड़ा है, जो पिछले कई वर्षों से नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मांग रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) को नोटिस जारी किया। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया की अगली कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जून 2026 को होगी।

आखिर विवाद क्या है?

दरअसल, 31 दिसंबर 2025 को आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए गए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में उन संविदा चिकित्सकों को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा, जिन्होंने लगातार पांच साल की सेवा पूरी कर ली है।

राज्य सरकार ने 11 मार्च 2025 की अधिसूचना में साफ प्रावधान किया था कि पांच साल की निरंतर सेवा पूरी करने वाले संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारियों को नियमित भर्ती में 50% आरक्षण मिलेगा। हालांकि शर्त यह रखी गई थी कि वे समकक्ष पद पर कार्यरत हों। यही सवाल अब अदालत के सामने है कि क्या केवल वेतनमान अलग होने की वजह से इन चिकित्सकों को आरक्षण से बाहर रखा जा सकता है?

कोर्ट में सरकार और याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने अदालत को बताया कि संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारी उसी पद पर काम कर रहे हैं, जिसके लिए नियमित भर्ती निकाली गई है। ऐसे में सिर्फ वेतनमान का अंतर दिखाकर उन्हें आरक्षण लाभ से वंचित करना उचित नहीं है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि एक अवमानना प्रकरण में राज्य सरकार पहले ही स्वीकार कर चुकी है कि आयुष विभाग ने संविदा चिकित्सकों के वेतनमान को नियमित अधिकारियों के बराबर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग से अनुरोध किया है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

हजारों संविदा चिकित्सकों के लिए क्यों अहम है फैसला?

इस अंतरिम आदेश से प्रदेशभर के हजारों संविदा आयुष चिकित्सकों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से ये डॉक्टर नियमित भर्ती में आरक्षण और सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे थे। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक को उनके लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। अगर अदालत आगे चलकर संविदा चिकित्सकों के पक्ष में फैसला देती है, तो भर्ती प्रक्रिया और चयन नियमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 

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