मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गेस्ट फैकल्टी को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि रेगुलर शिक्षक की नियुक्ति के बाद भी उन्हें सीधे नहीं हटाया जा सकता। सरकार को पहले दूसरे रिक्त पद पर नियुक्ति का अवसर देना होगा।
मध्य प्रदेश में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर काम कर रहे हजारों शिक्षकों के लिए हाईकोर्ट का ताजा फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी संस्थान में नियमित शिक्षक की नियुक्ति होने भर से गेस्ट फैकल्टी की सेवा खत्म नहीं की जा सकती। राज्य सरकार को पहले उन्हें उपलब्ध किसी अन्य रिक्त पद पर समायोजित करने का विकल्प देना होगा।
यह आदेश रीवा आईटीआई में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी सुमन वर्मा की याचिका पर सुनाया गया। जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कहा कि नौकरी समाप्त करना अंतिम विकल्प होना चाहिए। यदि प्रदेश में कहीं भी रिक्त पद उपलब्ध है तो पहले वहां पदस्थापना की प्रक्रिया अपनाई जाए।
गेस्ट फैकल्टी को मिली अहम कानूनी राहत
मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने की। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जिस संस्थान में सुमन वर्मा कार्यरत थीं, वहां नियमित शिक्षक भावना डहरिया की नियुक्ति हो चुकी है। इसी आधार पर गेस्ट फैकल्टी की सेवा समाप्त होने का सवाल उठा। कोर्ट ने माना कि केवल नियमित नियुक्ति होने से किसी गेस्ट फैकल्टी को तत्काल हटाना उचित नहीं होगा।
सरकार को पहले देना होगा दूसरा विकल्प
अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी संस्थान में गेस्ट फैकल्टी की आवश्यकता समाप्त होती है तो सरकार उन्हें राज्य के किसी अन्य उपलब्ध रिक्त पद पर पदस्थ करने का अवसर दे। इससे शिक्षकों की सेवा निरंतर बनी रहेगी और अचानक रोजगार खत्म होने की स्थिति नहीं बनेगी। अदालत ने इस दौरान ग्वालियर बेंच के 20 मई 2025 के अंतरिम आदेश का भी संदर्भ लिया और उसी सिद्धांत को लागू किया।
कब समाप्त की जा सकेगी सेवा
हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि यदि सरकार दूसरी जगह नियुक्ति की पेशकश करती है और संबंधित गेस्ट फैकल्टी उसे स्वीकार करने से इनकार कर देता है या जॉइन नहीं करता, तब शासन सेवा समाप्त करने की कार्रवाई कर सकता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी से लिखित सहमति या असहमति लेना भी आवश्यक होगा ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा असर
यह फैसला सिर्फ एक याचिका तक सीमित नहीं माना जा रहा। प्रदेश के कॉलेजों और आईटीआई में कार्यरत हजारों गेस्ट फैकल्टी के लिए यह आदेश भविष्य के मामलों में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। अब नियमित शिक्षक की नियुक्ति के बाद सीधे सेवा समाप्त करने के बजाय समायोजन की प्रक्रिया अपनानी होगी, जिससे अस्थायी शिक्षकों को रोजगार सुरक्षा का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

सुमन वर्मा की याचिका पर आया आदेश
रिट याचिका क्रमांक 24605/2026 में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की सेवाएं समाप्त करने के बजाय पहले राज्य में उपलब्ध किसी रिक्त पद की पेशकश की जाए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो संबंधित गेस्ट फैकल्टी के पास सेवा समाप्ति के आदेश को कानूनी चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।