मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रोबेशन अवधि में वेतन कटौती की व्यवस्था को अवैध करार देते हुए नियमित कर्मचारियों को 100% वेतन, एरियर और सभी वित्तीय लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रोबेशन पर कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए वेतन कटौती की व्यवस्था को अवैध करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमित चयन प्रक्रिया से नियुक्त कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में भी पूरा वेतन मिलने का अधिकार है। इसके साथ ही राज्य सरकार को एरियर और सभी परिणामी वित्तीय लाभ देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह फैसला दमोह निवासी अपेक्षा पाठक की याचिका पर आया है। हाई कोर्ट ने नियुक्ति आदेश की उस शर्त को निरस्त कर दिया, जिसके तहत प्रोबेशन अवधि में 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान था। अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को पूरा वेतन, एरियर और अन्य वित्तीय लाभ 90 दिन के भीतर दिए जाएं।
हाई कोर्ट ने क्या कहा
न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने कहा कि नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्त प्रोबेशनर कर्मचारी भी संबंधित पद के न्यूनतम वेतनमान के अनुसार 100 प्रतिशत वेतन पाने के हकदार हैं। अदालत के अनुसार प्रोबेशन अवधि के नाम पर वेतन में कटौती का कोई वैध आधार नहीं बचता।
'समान कार्य के लिए समान वेतन' का सिद्धांत बना आधार
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता वैभव प्रवीण पांडे ने दलील दी कि सामान्य प्रशासन विभाग का 12 दिसंबर 2019 का परिपत्र पहले ही इंदौर खंडपीठ द्वारा दूसरे मामलों में विधि विरुद्ध घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को केवल प्रोबेशन के आधार पर कम वेतन देना संविधान के 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के सिद्धांत का उल्लंघन है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार किया।
राज्य सरकार की दलील क्यों नहीं मानी गई
राज्य शासन ने सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र का हवाला देकर नियुक्ति आदेश का बचाव किया। हालांकि अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले ही न्यायिक निर्णय आ चुका है। ऐसे में उसी आधार पर वेतन कटौती जारी रखना उचित नहीं माना जा सकता।
किन कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
यह फैसला नियमित चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त प्रोबेशन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे ऐसे कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में पूरा वेतन, एरियर और अन्य वित्तीय लाभ का दावा करने का कानूनी आधार मजबूत होगा। साथ ही भविष्य की नियुक्तियों में भी वेतन कटौती संबंधी शर्तों पर असर पड़ सकता है।