मध्य प्रदेश में लंबे समय से रुकी सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी हो गए हैं। GAD ने महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर विभागों को कार्रवाई करने को कहा है।
करीब एक दशक से पदोन्नति का इंतजार कर रहे मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागों को प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यह फैसला महाधिवक्ता की कानूनी राय मिलने के बाद लिया गया है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। यानी फिलहाल प्रमोशन का रास्ता खुल गया है, लेकिन अंतिम कानूनी स्थिति न्यायालय के निर्णय से तय होगी।
प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने की वजह
सामान्य प्रशासन विभाग ने अपर मुख्य सचिवों, विभागाध्यक्षों और सभी कलेक्टरों को जारी पत्र में महाधिवक्ता की राय के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 से जुड़ी याचिकाओं के बीच उठाया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन की कानूनी राय में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने प्रमोशन नियम-2025 पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। पहले सरकार ने सुनवाई के दौरान प्रमोशन नहीं करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह न तो अदालत के आदेश का हिस्सा था और न ही न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में सरकार अपने वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकती है।
अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे प्रमोशन
कानूनी राय के अनुसार विभागीय पदोन्नति समितियां (DPC) गठित कर प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। हालांकि सभी पदोन्नतियां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। यदि भविष्य में अदालत का निर्णय अलग आता है तो उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने बताया क्यों जरूरी था फैसला
सरकार का कहना है कि वर्षों से पदोन्नति नहीं होने के कारण कई विभागों में वरिष्ठ पद खाली पड़े हैं। कानूनी राय में सरकार का यह पक्ष भी दर्ज है कि कई विभाग फिलहाल अपनी स्वीकृत क्षमता के करीब 40 प्रतिशत संसाधनों पर ही काम कर रहे हैं। इसका असर प्रशासनिक कार्यों के साथ नई भर्तियों पर भी पड़ रहा है।
हजारों कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा
GAD के निर्देश के बाद अब अलग-अलग विभाग विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें बुलाने की तैयारी शुरू कर सकते हैं। यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ती है तो लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। वहीं अंतिम पदोन्नति आदेश न्यायालय के फैसले के अनुरूप ही प्रभावी रहेंगे।