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Congress Dog Memorandum Row Sparks Controversy

कांग्रेस का अनुशासन: कुत्ते को ज्ञापन!

सीहोर में कांग्रेस द्वारा कुत्ते के गले में ज्ञापन लटकाने का मामला चर्चा में। इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद और बयानबाजी तेज हो गई है।


कांग्रेस का अनुशासन कुत्ते को ज्ञापन

सरयूसुत मिश्रा

खुद के आंदोलन का खुद ही मजाक

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस किसानों के लिए राज्य में आंदोलन करती है, लेकिन सरकार को ज्ञापन देने के अनुशासन का पालन भी नहीं करती। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सीहोर में किसानों की मांगों का ज्ञापन एक कुत्ते के गले में लटका दिया।

कांग्रेस में लोकतंत्र के लिए इससे अधिक घटिया सोच क्या हो सकती है। कुत्ते के गले में ‘कलेक्टर’ लिखकर टांग दिया गया और उसी को ज्ञापन दिया गया। यह भी कहा गया कि वह इसे सीएम तक पहुंचा दे। इससे दो संदेश निकलते हैं पहला, जिस मुद्दे पर आंदोलन किया जा रहा है, उस मांग को अनुशासनपूर्वक प्रशासन को देना भी कांग्रेस उचित नहीं समझती। दूसरा, कांग्रेस अपने अहंकार में प्रशासन की तुलना कुत्ते से करती है।

इससे पहले भी छिंदवाड़ा में ऐसा ही वाकया हुआ था, जहां कुत्ते के गले में ज्ञापन लटकाया गया था। कांग्रेस में पशु प्रतीकों के प्रति आकर्षण नया नहीं है। राज्य स्तर के नेता ही नहीं, बल्कि कांग्रेस का नेतृत्व संभालने वाले राहुल गांधी भी कई बार नेताओं की तुलना रेस, बारात या ‘लंगड़े घोड़े’ जैसे उदाहरणों से कर चुके हैं। कार्यकर्ताओं को बहादुर बताने के लिए भी तुलना ‘बब्बर शेर’ से की जाती है।

एमपी के कांग्रेस नेता कुत्ते को प्रशासन का प्रतीक मानते दिखते हैं। दोनों बार यह व्यवहार नेता प्रतिपक्ष के स्तर पर ही किया गया है।कांग्रेसी अक्सर अपने ही आंदोलनों का मजाक बनाते नजर आते हैं। पीसीसी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष खुद को ‘सीएम इन वेटिंग’ मानते हैं। ऐसे में संगठन के आंदोलनों को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें कमजोर किया जाता है। कुत्ते के गले में ज्ञापन देना पूरे आंदोलन की गंभीरता को समाप्त कर देता है।आंदोलन का आह्वान कांग्रेस संगठन की ओर से किया जाता है, लेकिन संगठन और विधायक दल के बीच तालमेल हमेशा मजबूत नहीं दिखता।

वफादारी और संवेदनशीलता का सवाल

कुत्ते अपनी वफादारी, तेज सूंघने और सुनने की क्षमता तथा इंसानी भावनाओं को समझने के लिए जाने जाते हैं। वे सामाजिक प्राणी हैं, जो सुरक्षा, स्नेह और साथीपन प्रदान करते हैं। यदि कांग्रेस इन गुणों को अपने आचरण में शामिल करे, तो उसकी स्थिति कुछ बेहतर हो सकती है।लेकिन कांग्रेस में न तो सुनने की क्षमता दिखाई देती है और न ही जनसमस्याओं को समझने की संवेदनशीलता। जब पार्टी आम जनता की भावनाओं से ही कट चुकी है, तो वह कुत्ते जैसे संवेदनशील प्राणी के गुणों को कैसे समझ पाएगी।कांग्रेस में अब केवल नेता ही नजर आते हैं, कार्यकर्ता और सेवा भावना लगभग समाप्त हो चुकी है। वही व्यक्ति सफल दिखता है, जो पद और परिवार से जुड़ा होता है।

अनुशासनहीनता पर चुप्पी

पीसीसी अध्यक्ष भी समर्थन मूल्य को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन में दो जिलों में गए, लेकिन उन्होंने इस तरह की ‘कुत्ता ज्ञापन’ शैली का प्रयोग नहीं किया। यह नई शैली कांग्रेस के मानसिक दिवालियापन का संकेत देती है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस बिना कमांडर की फौज की तरह व्यवहार करती नजर आती है। पद पर बैठे नेता मनमानी करते हैं और उनके कदाचार पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता।

कुत्ते को ज्ञापन देने की घटना गंभीर है, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस में चुप्पी है। प्रशासन को कुत्ते के प्रतीक के रूप में दिखाना क्या कांग्रेस के लिए सामान्य हो गया है? खुद के आंदोलन का मजाक बनाना शायद कांग्रेस में ही संभव है।

 

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