मध्यप्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा टिकट को लेकर विवाद गहराया। मीनाक्षी नटराजन के नाम पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की आशंका जताई जा रही है, जबकि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ को लेकर मांग तेज हुई।
अनुराग उपाध्याय
क्यों आया दिग्विजय और कमलनाथ का नाम ?
मध्यप्रदेश के कांग्रेस नेताओं का मानना है कि अगर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा का टिकट दिया, तो मध्यप्रदेश में 'हॉर्स ट्रेडिंग' जैसी घटना हो जाएगी। मीनाक्षी के नाम पर कांग्रेस के विधायक एकजुट नहीं रह सकते, इसलिए मध्यप्रदेश से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ या दिग्विजय सिंह जैसे व्यक्ति को ही राज्यसभा का टिकट देना चाहिए। राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में खदबदाहट मची हुई है।
एआईसीसी मीनाक्षी नटराजन को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजना चाहती है। कांग्रेस महासचिव मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस का दक्षिण भारत में काम देख रही हैं। वह राहुल गांधी की निकटस्थ हैं। उनका दिल्ली में भरपूर प्रभाव है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं को नटराजन के नाम पर ऐतराज है। प्रदेश के नेताओं ने दिल्ली पर दबाव बनाने के लिए 'हॉर्स ट्रेडिंग' जैसे शब्द का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
राहुल गांधी नेताओं की तुलना घोड़ों से कर चुके हैं
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भोपाल में ही अपने नेताओं की तुलना घोड़ों से कर चुके हैं। ऐसे में उनके उम्मीदवार को लेकर ही कांग्रेस नेता हॉर्स ट्रेडिंग की बात करें, तो इसे अन्यथा नहीं लेना चाहिए। इस बार राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होने है, जिसमें से प्राथमिकता के आधार पर से दो सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना है, लेकिन जिस तरह की परिस्थिति है उसमें ये एक सीट भी बड़ी आसानी से कांग्रेस के खाते में जाए इस पर संशय है। खबर तो यह भी है कि कांग्रेस के आधा दर्जन विधायक भाजपा के संपर्क में हैं जो कांग्रेस के एक सीट के गणित को बिगाड़ सकते हैं।
अब प्रदेश के कांग्रेस नेता चाह रहे हैं कि दिग्विजय सिंह या फिर कमलनाथ को राज्यसभा भेजा जाना चाहिए, ताकि कांग्रेस की एकजुटता बनी रहे। कांग्रेसियों का मानना है इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों का विधायकों पर बड़ा प्रभाव है। ये दोनों नेता विधायकों को बांध कर रख सकते हैं। मीनाक्षी नटराजन एक अरसे से प्रदेश के राजनैतिक पटल पर पहले सी एक्टिव नहीं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अभी राज्यसभा सदस्य हैं, लेकिन वे ऐलान कर चुके हैं कि वे इस बार राज्यसभा नहीं जाना चाहते हैं। बताते हैं दिग्विजय सिंह को भी राज्यसभा चुनाव को लेकर कुछ न कुछ संशय जरूर है, इसलिए उन्होंने पहले ही चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। हालांकि, ये उनकी अपनी नई सियासी रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है, वहीं कमलनाथ खुद राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं। उनकी चाहत हैं कि एआईसीसी उनके पुत्र नकुलनाथ को राज्यसभा भेज दे। ऐसे में कांग्रेस के भीतर हालातों को आसानी से समझा जा सकता है।
इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी राज्यसभा जाने से इंकार कर चुके हैं, लेकिन पार्टी उनको राज्यसभा भेजने की कोशिश करती है तो वे इनकार नहीं करेंगे। कांग्रेस नेता कमलेश्वर पटेल की राहुल गांधी से नजदीकी है, इसलिए उनके समर्थक मान के चल रहे हैं कि राज्यसभा का द्वार पटेल के लिए खुल जाएगा। कुछ मामलों में प्रदेश कांग्रेस के नेता ही पटेल को जुगाडू कहते हैं। पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा भी राज्यसभा जाने का मन बनाए हुए हैं, वे अनुसूचित वर्ग से आते हैं।