भोपाल में सरकार पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए बड़ा बदलाव कर सकती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने और ईवी टैक्सी को बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल खपत कम करने की अपील का असर अब मध्य प्रदेश सरकार की नीतियों में दिखने लगा है। राज्य सरकार अब शासकीय कार्यों में ईंधन खर्च घटाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को टैक्सी के रूप में इस्तेमाल करने की योजना पर काम शुरू हो गया है।
ईवी टैक्सी मॉडल पर सरकार का फोकस
सरकारी कामकाज में अब निजी एजेंसी के जरिए इलेक्ट्रिक वाहन लेने की तैयारी है। इसका मकसद पेट्रोल-डीजल की निर्भरता कम करना और खर्च पर नियंत्रण रखना बताया जा रहा है। वित्त विभाग इस मॉडल को लागू करने की दिशा में नीतिगत बदलाव कर रहा है। इसके साथ ही सरकारी वाहनों के उपयोग को भी सीमित करने की योजना है।
सीएम काफिले में हो सकता है बड़ा बदलाव
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाई जा सकती है। फिलहाल उनके काफिले में करीब 13 वाहन शामिल हैं। इनमें से लगभग 5 से 6 गाड़ियां कम करने पर विचार चल रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए केवल जरूरी वाहन ही काफिले में रखे जाएंगे। इसके अलावा जहां भी मुख्यमंत्री का दौरा होगा, वहां भी अनावश्यक वाहनों और भीड़ को नियंत्रित करने पर जोर दिया जा सकता है।
सरकारी खर्चों पर सख्ती
राज्य सरकार पहले ही नए सरकारी वाहन खरीद पर रोक लगा चुकी है। वन विभाग और पुलिस को छोड़कर बाकी सभी विभागों में नई गाड़ियों की खरीद बंद कर दी गई है। वित्त विभाग अब यह तय करने जा रहा है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का उपयोग कैसे और कितना किया जाए। जल्द ही इस पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
विदेश यात्राओं और फ्लीट सिस्टम पर भी असर
सरकारी स्तर पर खर्च कम करने के लिए विदेश यात्राओं पर भी रोक लगाई गई है। साथ ही सरकारी काफिले और फ्लीट सिस्टम को भी छोटा करने पर विचार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को भी स्पष्ट संदेश दिया है कि ईंधन खर्च और सरकारी संसाधनों का उपयोग सीमित किया जाए।
मंत्रियों के काफिले में फिलहाल कोई बदलाव नहीं
हालांकि मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या घटाने पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। प्रदेश में 30 मंत्री हैं और उनके काफिलों में सामान्यतः 3 से 4 वाहन शामिल रहते हैं। इन वाहनों को स्टेट गैराज से उपलब्ध कराया जाता है और ईंधन की व्यवस्था भी सरकारी स्तर पर होती है।
नीति का फोकस ऊर्जा बचत पर
सरकार का पूरा फोकस अब ऊर्जा बचत और खर्च नियंत्रण पर है। आने वाले समय में कम ईंधन खपत वाले वाहनों को प्राथमिकता देने की योजना है। इस बदलाव को प्रशासनिक सुधार और पर्यावरणीय संतुलन दोनों के रूप में देखा जा रहा है।