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Ozone Gas Rising in MP Cities Air

महानगरों की हवा में समाए सांसों के नए दुश्मन

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई शहरों की हवा में ओजोन और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस खतरनाक स्तर पर पहुंच रही है। विशेषज्ञों ने इसे नया पर्यावरणीय खतरा बताया।


महानगरों की हवा में समाए सांसों के नए दुश्मन

शहरी पर्यावरण की हवा को जहरीला बना रही ओजोन और कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस

मध्यप्रदेश के बड़े शहरों की हवा में दो नए पर्यावरणीय दुश्मनों की पहचान हुई है। ये दोनों पर्यावरणीय शत्रु गैस के रूप में मौजूद हैं। दरअसल, धरातल के निकट पाई जाने वाली ओजोन (O₃) और कार्बन मोनो ऑक्साइड (CO) गैसें प्रदेश के कई शहरों में मुख्य प्रदूषक के रूप में चिन्हित की गई हैं।

चिन्हित किए गए ये नए दुश्मन धूल, धुआं, निर्माण सामग्री और पराग आदि के महीन कणों (PM 10 और PM 2.5) से भी अधिक घातक माने जा रहे हैं। दबे पांव हवा में समा चुकी ये दोनों गैसें सांसों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। इस कारण ये गैसें अब शहरी योजनाकारों के लिए भी चिंता का विषय बन गई हैं।

इंदौर में साइलेंट किलर ने दी दस्तक

झील और जंगलों के लिए पहचाने जाने वाले भोपाल शहर के टीटी नगर क्षेत्र में धरातल पर ओजोन गैस की औसत उपलब्धता 105 से 149.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई है। इसी तरह ग्वालियर के सिटी सेंटर इलाके में ओजोन की मात्रा 109.20 से 111.18 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच पाई गई है।

जबलपुर के सुहागी इलाके, कटनी के गोलाबाजार और सागर में भी ओजोन की उपलब्धता 90 से 109 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज की गई है, जिसे मुख्य प्रदूषक के रूप में चिन्हित किया गया है। यह स्तर तय मानकों से अधिक है। बता दें कि आठ घंटे की अवधि के लिए ओजोन की सुरक्षित सीमा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मानी जाती है। साफ है कि यह प्रदूषक अपनी सहनशीलता की लक्ष्मण रेखा पार कर चुका है।

क्या आप जानते हैं?

प्रदूषित हवा के कारण हर दिन लाखों लोग समय से पहले बीमार हो रहे हैं।

खराब ओजोन की भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में दस्तक

ओजोन दो प्रकार की होती है। वायुमंडल में पाई जाने वाली ओजोन हमारी धरती के लिए रक्षा कवच का काम करती है। सरल भाषा में इसे “अच्छी ओजोन” कहा जाता है।वहीं, “खराब ओजोन” धरती की सतह पर पाई जाती है। यह वाहनों के ईंधन और कारखानों से निकलने वाले प्रदूषण से बनती है। यह सांस के लिए बेहद घातक होती है और स्मॉग या धुंध के रूप में दिखाई देती है।

इंदौर की हवा में बढ़ रहा कार्बन मोनो ऑक्साइड का खतरा

साफ-सुथरे शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में वायु प्रदूषण के लिहाज से स्थिति संवेदनशील होती जा रही है। यहां मुख्य प्रदूषक गैस कार्बन मोनो ऑक्साइड पाई गई है। इसकी मात्रा 4.17 से 8.62 मिलीग्राम प्रति घन मीटर के बीच दर्ज की गई है। हालांकि इसकी सुरक्षित सीमा 10 मिलीग्राम प्रति घन मीटर तक मानी जाती है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह गैस जल्द ही सुरक्षित स्तर की सीमा पार कर सकती है। इंदौर के अलावा खरगौन, सागर और नीमच में भी इस “साइलेंट किलर” को मुख्य प्रदूषक के रूप में पहचाना जाने लगा है।

कार्बन मोनो ऑक्साइड लकड़ी, कोयला, पेट्रोल और प्राकृतिक गैस के अपूर्ण दहन से उत्पन्न होती है। इसे “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी गंध के सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाती है। यह फेफड़ों के रास्ते रक्त में मिलकर ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित करती है। हालांकि फिलहाल यह चिंता शुरुआती स्तर पर है।

छोटे शहरों में भी बढ़ा वायु प्रदूषण

हालांकि मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि प्रदेश की हवा के लिए अभी भी सबसे बड़ा खतरा PM 10 और PM 2.5 ही हैं, क्योंकि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में इनकी हिस्सेदारी सबसे अधिक रहती है।नोट: यह सभी आंकड़े 14 से 16 मई के दौरान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रीयल टाइम मॉनिटरिंग विंग से लिए गए हैं।

 

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