चंबल नदी में घटते जलस्तर पर सुप्रीम कोर्ट में चिंता जताई गई। सीईसी रिपोर्ट में घड़ियाल और डॉल्फिन के अस्तित्व पर खतरा बताया गया है। इको फ्लो बनाए रखने पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन के बाद अब चंबल नदी का लगातार घटता जलस्तर नई चिंता बनकर सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि नवंबर से जून के बीच नदी में पानी की कमी घड़ियाल, डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर में लगातार गिरावट के कारण जलीय जीवों के प्रजनन, भोजन और प्रवास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो चंबल की जैव विविधता पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
सीईसी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में चंबल और उसकी सहायक नदियों में “पर्यावरणीय प्रवाह” यानी इको फ्लो बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। समिति का मानना है कि नदी में न्यूनतम आवश्यक जल प्रवाह बना रहना बेहद जरूरी है, ताकि जलीय जीवों का प्राकृतिक जीवन चक्र प्रभावित न हो।रिपोर्ट में भारतीय वन्यजीव संस्थान, जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग और संबंधित राज्यों के संयुक्त अध्ययन की सिफारिश की गई है। समिति ने कहा कि वैज्ञानिक आधार पर जल प्रवाह की सीमा तय करना जरूरी है।
घड़ियाल और डॉल्फिन पर क्यों बढ़ा खतरा?
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन जैसे दुर्लभ जीवों का महत्वपूर्ण आवास माना जाता है। जलस्तर घटने से नदी के कई हिस्सों में पानी उथला हो रहा है, जिससे इन जीवों के लिए सुरक्षित क्षेत्र सीमित होते जा रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार घड़ियालों के अंडे देने और डॉल्फिन के आवागमन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कई स्थानों पर पानी की कमी के कारण प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला भी प्रभावित हो रही है।
नई परियोजनाओं पर रोक की सिफारिश
सीईसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब तक चंबल नदी में इको फ्लो की स्थिति में सुधार नहीं होता, तब तक पेयजल परियोजनाओं को छोड़कर अन्य नई परियोजनाओं को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।समिति का मानना है कि अनियंत्रित जल दोहन और अवैध गतिविधियां नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर कर रही हैं। ऐसे में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
चंबल अभयारण्य क्यों है अहम?
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश तक फैला हुआ है। यह क्षेत्र घड़ियाल संरक्षण के लिए देश का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में डॉल्फिन, कछुए और प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं।पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि चंबल नदी का प्राकृतिक प्रवाह लगातार प्रभावित होता रहा तो इसका असर केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर भी पड़ेगा।