मध्यप्रदेश कैबिनेट ने OBC छात्रों की स्कॉलरशिप 1550 से बढ़ाकर 10 हजार कर दी है। साथ ही आंगनवाड़ी, सिंचाई और मेडिकल सेक्टर में बड़े फैसले लिए गए, जानिए असर।
भोपाल। मध्यप्रदेश में मोहन कैबिनेट ने एक ही बैठक में कई बड़े फैसले लेकर सीधा असर छात्रों, किसानों और स्वास्थ्य सेवाओं पर डाल दिया है। फैसले 28 अप्रैल की कैबिनेट बैठक में लिए गए। सरकार ने OBC छात्रों की स्कॉलरशिप में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। साथ ही आंगनवाड़ियों में बिजली, सिंचाई परियोजना और मेडिकल कॉलेजों के लिए करोड़ों का बजट मंजूर हुआ है।
इन फैसलों को सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक असर के तौर पर भी देखा जा रहा है।
स्कॉलरशिप में 6 गुना उछाल
सबसे बड़ा फैसला OBC छात्रों को लेकर आया है। जो छात्र दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनकी मासिक सहायता 1550 रुपए से बढ़ाकर सीधे 10 हजार कर दी गई है। यह बढ़ोतरी सिर्फ रकम नहीं, बल्कि अवसरों तक पहुंच का सवाल भी है। महंगे शहर में रहने वाले छात्रों के लिए यह राहत बड़ी मानी जा रही है। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह सुविधा सभी जरूरतमंद छात्रों तक पहुंच पाएगी या सीमित दायरे में ही रह जाएगी।
आंगनवाड़ियों में बिजली से बेहतर सेवाएं
करीब 39 हजार आंगनवाड़ी भवनों में बिजली कनेक्शन देने के लिए 80 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया है। ग्रामीण इलाकों में कई आंगनवाड़ियां अब भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रही हैं। बिजली आने से बच्चों और महिलाओं के लिए सेवाएं बेहतर हो सकती हैं। लेकिन पिछली योजनाओं के अनुभव को देखते हुए लोगों की नजर अब इसके क्रियान्वयन पर टिकी रहेगी।
सिंचाई परियोजना से किसे फायदा
शाजापुर के लखुंदर बांध में पम्प हाइड्रो सिस्टम के लिए 155 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इससे शाजापुर के 17 और उज्जैन के तराना क्षेत्र के 7 गांवों को सीधा फायदा मिलेगा। करीब 9 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई सुविधा मिलेगी। सरकार का दावा है कि इससे 30 प्रतिशत तक सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा, जो किसानों की आय पर असर डाल सकता है।
मेडिकल सेक्टर में निवेश
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में पीजी सीट्स बढ़ाने के लिए 80 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। इससे डॉक्टरों की संख्या और ट्रेनिंग क्षमता बढ़ सकती है। वहीं, रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए 174 करोड़ रुपए का संशोधित बजट पास किया गया है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लगातार उठते सवालों के बीच यह फैसला राहत के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन असली असर जमीन पर काम शुरू होने के बाद ही दिखेगा।