मध्यप्रदेश भाजपा ने मिशन 2027 की तैयारी तेज कर दी है। 17 मई से मंत्रियों, हार वाली सीटों और निकाय चुनाव रणनीति पर व्यापक राजनीतिक समीक्षा शुरू होगी।
मध्यप्रदेश में आगामी निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर भाजपा ने अभी से चुनावी मोर्चाबंदी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार और संगठन 17 मई से व्यापक राजनीतिक समीक्षा अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इस अभियान का केंद्र वे 65 विधानसभा सीटें होंगी, जहां पिछले चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ वन-टू-वन चर्चा करेंगे। इसमें उनके प्रभार वाले जिलों, गृह जिलों और विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति का आकलन किया जाएगा। संगठन की ओर से राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी समीक्षा बैठकों में मौजूद रहेंगे।
इन बैठकों को संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन, दोनों स्तरों पर प्रदर्शन के आधार पर नई जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं। मुख्यमंत्री का फोकस केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संकल्प पत्र के वादों, विभागीय कामकाज और जिलों में संगठनात्मक समन्वय पर भी रहेगा।
विभागों की मैराथन समीक्षा
21 से 23 मई के बीच विभागवार समीक्षा बैठकों का आयोजन होगा। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों को अपने विभागों की उपलब्धियां, नवाचार और घोषणाओं की प्रगति प्रस्तुत करनी होगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसके लिए विशेष पावर पॉइंट प्रारूप जारी किया है और पहली बार क्यूआर कोड आधारित प्रणाली लागू की गई है।
सरकार की प्राथमिकता यह भी है कि विभागीय मंत्री और निगम-मंडल अध्यक्ष आपसी टकराव से बचते हुए समन्वय के साथ काम करें। इसी उद्देश्य से जल्द ही हाई-प्रोफाइल ओरिएंटेशन बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें टीमवर्क और बेहतर प्रशासनिक संस्कृति पर जोर दिया जाएगा।
दिल्ली दौरे पर राजनीतिक नजर
इन बैठकों से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रस्तावित दिल्ली दौरा भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi से उनकी संभावित मुलाकात को लेकर सत्ता और संगठन में बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब 2027 और 2028 के चुनावी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक पुनर्संरचना और नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रही है।
निकाय चुनावों में नए चेहरों पर दांव
भाजपा ने 2027 के नगरीय निकाय चुनावों के लिए भी रणनीति बदलने के संकेत दिए हैं। पार्टी इस बार चुनाव से काफी पहले प्रत्याशी चयन प्रक्रिया शुरू करेगी और युवा नेतृत्व को आगे लाने पर फोकस रहेगा।सूत्रों के मुताबिक 60 वर्ष से अधिक आयु वाले नेताओं और लगातार तीन बार पार्षद रह चुके चेहरों को टिकट मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। पार्टी इंटरनेट मीडिया पर सक्रियता, जनसंपर्क और संगठनात्मक भागीदारी को भी उम्मीदवार चयन का आधार बनाएगी।भाजपा संगठन संभावित प्रत्याशियों का सर्वे कराने की तैयारी में है। जिला और संभाग स्तर के प्रभारियों को ऐसे युवाओं की पहचान की जिम्मेदारी दी जाएगी, जो संगठन में सक्रिय होने के साथ स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय भी हों।