मध्य प्रदेश में भाजपा नेता वीरेंद्र गोयल ई-रिक्शा से कार्यभार ग्रहण करने निकले, लेकिन पीछे 200 वाहनों का काफिला जुड़ गया। पीएम की ईंधन बचत अपील के बीच यह मामला चर्चा में है।
मध्य प्रदेश के जबलपुर और सिंगरौली क्षेत्र में एक राजनीतिक दृश्य ने सबका ध्यान खींच लिया। भाजपा नेता और सिंगरौली विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल कार्यभार ग्रहण करने ई-रिक्शा से निकले। लेकिन यह यात्रा जितनी सादगी भरी दिखी, उतनी ही चर्चा में इसलिए आ गई क्योंकि पीछे करीब 200 वाहनों का लंबा काफिला चल रहा था। यह पूरा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत अपील के संदर्भ में और भी ज्यादा सुर्खियों में आ गया है।
ई-रिक्शा में सादगी, सड़क पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन
वीरेंद्र गोयल मोरवा स्थित अपने आवास से ई-रिक्शा में बैठकर 27 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय के लिए रवाना हुए। शुरुआती दृश्य में यह कदम पीएम मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील से जुड़ा संदेश देता दिखा। लेकिन जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, समर्थकों की भीड़ जुड़ती गई और पूरा रास्ता वाहनों के काफिले से भर गया। ई-रिक्शा के पीछे कारों और दोपहिया वाहनों की लंबी कतार ने इसे एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया।
200 वाहनों का काफिला बना चर्चा का केंद्र
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक इस यात्रा में करीब 200 वाहन शामिल हो गए। यह संख्या खुद में ही इस पूरे घटनाक्रम को खास बना देती है। लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि क्या यह सच में सादगी का संदेश था या फिर समर्थकों का अनियंत्रित शक्ति प्रदर्शन। सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीरें तेजी से वायरल हो गईं।
पीएम मोदी की अपील और राजनीतिक संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पेट्रोल-डीजल की बचत और कम संसाधनों के उपयोग की अपील की थी। उसी संदर्भ में भाजपा नेता का ई-रिक्शा से चलना एक प्रतीकात्मक कदम माना गया। हालांकि पीछे का विशाल काफिला इस संदेश को लेकर अलग ही बहस खड़ा कर गया। कई लोग इसे विरोधाभासी राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
नेता की सफाई और समर्थकों की भीड़
वीरेंद्र गोयल ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर सादगी दिखाने के लिए ई-रिक्शा चुना था। उनका कहना है कि पीछे चल रहा काफिला उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं का था, जिन्हें रोकना उनके नियंत्रण में नहीं था। उन्होंने यह भी दोहराया कि वह पीएम मोदी के ईंधन बचत संदेश का पूरी तरह समर्थन करते हैं और उसी भावना से यह यात्रा की गई थी।